“मासिक धर्म प्राकृतिक प्रक्रिया है इसे बाधक नहीं होना चाहिए”- डॉ. उत्कर्ष बंसल

लखनऊ। भारतीय बालरोग अकादमी व किशोर स्वास्थ्य अकादमी के द्वारा आयोजित कार्यशाला में डॉ. उत्कर्ष बंसल ने "मासिकधर्म एक प्राकृतिक प्रक्रिया है इसे किशोरियों के सामान्य जीवन में बाधक नही होना चाहिए"  विषय में आयोजित कार्यशाला में कही। उन्होंने कहा की आज भी इस विषय में समाज में बहुत सी भ्रांतियां व्याप्त हैं, जिनके निराकरण के लिये सभी को आगे आना चाहिए।

इस कार्यशाला में सेठ एम आर जयपुरिया, गोयल कैंपस की करीब 50 किशोरियों ने भाग लिया। डॉ. अर्जिता ने एक बच्ची की कहानी के माध्यम से मासिक धर्म से होने वाली समस्याओं से अवगत कराया और उनकी हिचक दूर की। सामान्य रूप से 11 से 15 वर्ष के बीच किशोरियों का मासिक शुरू हो जाता है जो 21 से 35 दिन के चक्र में होता है। रक्तस्राव 2 से 7 दिन हो सकता है जिसमें 30-70 एमएल रक्त प्रतिदिन होना सामान्य है। डा. दीक्षा ने असामान्य मासिक धर्म के बारे में बताया और कहा ऐसी स्तिथि में तुरंत अभिवावकों की मदद से चिकित्सकीय सलाह लेने को कहा। तत्पश्चात प्रो. पी. शेंबगम ने किशोरियों को मासिक धर्म के दौरान सफ़ाई रखने कि प्रक्रिया और अंधविश्वास से दूर रहने की सलाह दी। सारे सहभागियों एवं किशोरियों ने प्रतिज्ञा की "हम मासिकधर्म पर चुप्पी तोड़ेंगे। बेवजह शर्माएंगे नही बल्कि इसमें गौरव का अनुभव करेंगे। अपने घर और बाहर बात करके और किशोरियों की मदद करेंगे।" इसके पश्चात किशोरियों ने बढ़-चढ़ कर चिकित्सकों से बात करके अपनी परेशानियों का समाधान  प्राप्त किया।

स्कूल की प्रधानाचार्या डॉ. रीना पाठक ने इस प्रयास की सराहना करते हुए सबका अभिनंदन किया।

चिकित्सीय सलाह लें यदि:-

-मासिक धर्म 10 साल से पूर्व शुरू हो जाये या 15 साल के बाद भी न हो।
-मासिक धर्म लगातार 21 दिन से कम या 35 दिन से ज्यादा हो।
-अत्यधिक रक्तस्राव 
-अत्यधिक दर्द होना
-स्राव में दुर्गन्ध