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जज के घर से कैश मिलने की अफवाह के बाद मचा हडक़ंप

नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के घर आग लगने के दौरान कथित रूप से 15 करोड़ की रकम मिलने की अफवाह से शुक्रवार को पूरे देश में हडक़ंप मच गया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामले की इन हाउस जांच की बात की अफवाह भी फैली, जिससे मामला सच प्रतीत होने लगा। हालांकि शाम होते-होते सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसफर को अलग केस बताते हुए जज के घर से नकद मिलने की बात को नकार दिया। एक रिपोर्ट के अनुसार होली की छुट्टियों के दौरान उनके सरकारी बंगले में बड़ी मात्रा में बेहिसाब नकदी मिलने के बाद उनकी ट्रांसफर का फैसला लिया गया था। अफवाह थी कि यह धनराशि उस समय मिली, जब इमारत में आग लग गई और न्यायाधीश (जो उस समय शहर में नहीं थे) के परिवार के सदस्यों ने आपातकालीन सेवाओं को फोन किया। जिसके बाद आग बुझाने गए दिल्ली अग्निशमन विभाग के अधिकारियों को कथित तौर पर उनके घर में बेहिसाब नकदी मिली थी। उन्होंने फिर पुलिस को बुलाया था। हालांकि दमकल विभाग ने शुक्रवार को कहा कि हमें नकदी नहीं मिली थी। दिल्ली अग्निशमन सेवा प्रमुख अतुल गर्ग ने कहा कि आग स्टेशनरी और घरेलू सामान से भरे एक स्टोर रूम में लगी थी।

आग पर काबू पाने में 15 मिनट लगे। कोई हताहत नहीं हुआ। आग बुझाने के तुरंत बाद हमने पुलिस को आग की घटना की सूचना दी। इसके बाद दमकल कर्मियों की एक टीम मौके से चली गई। दमकल कर्मियों को आग बुझाने के दौरान कोई नकदी नहीं मिली। उधर, कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि जज के घर से इतनी बड़ी मात्रा में नकदी मिलना बहुत गंभीर मामला है और इसे उनका तबादला करके दबाया नहीं जा सकता। न्यायपालिका में देश का विश्वास बनाए रखने के लिए यह पता लगाना जरूरी है कि यह पैसा किसका है और जज को क्यों दिया गया। भाजपा नीत केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि अग्निशमन विभाग प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से बेहतर काम कर रहा है। मामले पर भाजपा ने कहा कि पार्टी को अदालतों के मामलों पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए और सीजेआई पहले से ही इस मामले से अवगत हैं। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) ने इस मामले पर निर्णय ले लिया है, जिससे उच्च न्यायपालिका पर लोगों की असहज नजर पड़ रही है।

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