
इस्लामाबाद। एक पाकिस्तानी व्यक्ति से विवाह करने वाली भारत की सरबजीत सिंह कौर को भारतीय अधिकारियों को सौंपने के बारे में अंतिम फैसले तक लाहौर के एक शेल्टर होम में शिफ्ट कर दिया गया है। जियो न्यूज ने मंगलवार को सूत्रों के हवाले से बताया कि सरबजीत को लाहौर के दार-उल-अमन में भेज दिया गया है। अधिकारी उसकी कानूनी और प्रशासनिक स्थिति पर बातचीत कर रहे हैं। उसे भारतीय अधिकारियों को सौंपने की प्रक्रिया अभी तय नहीं हुई है।
सरबजीत को पहले वाघा बॉर्डर पर परेड की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद भारत वापस भेजा जाना था, हालांकि उसके यात्रा दस्तावेजों में तकनीकी दिक्कतों के कारण उसकी वापसी नहीं हो पाई। भारतीय अधिकारियों द्वारा दस्तावेजीकरण प्रक्रिया पूरी होते ही उसे भारत को सौंप दिया जाएगा। इस बीच पंजाब हाई कोर्ट में सरबजीत के खिलाफ मुकदमा लड़ रहे वकील अली चंगेजी सिंधु ने कहा कि मामला अभी भी न्यायालय में लंबित है। गत पांच दिसंबर को सुनवाई के दौरान जस्टिस फारूक हैदर ने कैबिनेट डिवीजन, पंजाब पुलिस महानिरीक्षक, केंद्रीय जांच एजेंसी और अन्य संबंधित संस्थानों से रिपोर्ट मांगी थी।
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सरबजीत पिछले साल चार नवंबर को भारत से सिख तीर्थयात्रियों के एक ग्रुप के साथ पाकिस्तान आई थी। अपने तीर्थयात्रा ग्रुप के साथ भारत लौटने के बजाय वह पाकिस्तान में ही रुक गई। उसने इस्लाम धर्म अपना लिया और शेखूपुरा के रहने वाले नासिर हुसैन से अपनी पसंद से शादी कर ली। बताया जाता है कि सरबजीत ने सबसे पहले 2016 में सोशल मीडिया के जरिए हुसैन से संपर्क किया था, जो बाद में एक रिश्ते में बदल गया। यह भी पता चला है कि उसने अपना नाम बदलकर नूर रख लिया है।
पाकिस्तान में सरबजीत की मौजूदगी का पता चला, तो ये घटनाक्रम बाद में आधिकारिक जांच का हिस्सा बन गए। उसके वकील अहमद हसन पाशा ने बताया कि फॉरेनर्स एक्ट 1946 के तहत सरबजीत को पाकिस्तान में रहने की इजाज़त नहीं थी, इसीलिए उसे भारत वापस भेजने की व्यवस्था की गई थी। उन्होंने कहा कि वह बाद में भारत से स्पाउस वीजा पर पाकिस्तान लौट सकती है और उसके बाद स्थायी निवास के लिए आवेदन कर सकती है।









