विवेकानंद जयंती के अवसर पर विशेष – उठो, जागो, आगे बढ़ो…..

उठो, जागो, आगे बढ़ो…..


12 जनवरी को हर वर्ष हम लोग राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाते हैं इसके पीछे उनका जो प्रेरणा वाक्य है उठो, जागो और आगे बढ़ो। यह विचार आत्मविश्वास और ऊर्जा से हमें भर देता है। नरेंद्र से विवेकानंद वह कैसे बने इसके पीछे कोलकाता की दक्षिण काली मंदिर में स्वामी रामकृष्ण परमहंस द्वारा मां काली के असीम ऊर्जा के आशीर्वादात्मक के स्वरूप से विवेकानंद का परिचय कराया और उन्हें भक्ति ज्ञान और विवेक का मंत्र देकर संस्कारित किया। इसी ऊर्जा और प्रेरणा ने नरेंद्र नाथ को विवेकानंद के रूप में स्थापित किया और शिकागो के धर्म सम्मेलन में उनका उद्धबोधन गौरवशाली इतिहास बन गया। जब उन्होंने अमेरिका के लोगों को भाई और बहन के रूप में संबोधित किया और उसके बाद तीन दिनों तक चलने वाले संबोधन में वहां उपस्थित धर्माचार्यों और नागरिकों के हृदय पर अपने व्यक्तित्व की अमिट छाप छोड़ी। इसी घटना की याद में युवा दिवस मनाने की परंपरा चली आ रही है मुख्य संदेश यही है की असीम आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ यदि कोई कार्य मानव मात्र के कल्याण के लिए किया जाए और आम व्यक्ति को ईश्वर का प्रतिरूप समझकर सेवा भाव से कुछ भी किया जाए वही आज के संदर्भ में भी उपयुक्त पाथेय होगा। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए पेश है खास रिपोर्ट….।

1. यूनाइटेड यूनिवर्सिटी, प्रयागराज की श्रीजल बताती है कि युवा राष्ट्र की आत्मा, ऊर्जा और परिवर्तन की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं, जिनके सपनों और संकल्पों पर देश का भविष्य टिका होता है। जब युवा सही दिशा में आगे बढ़ता है तो केवल उसका जीवन ही नहीं संवरता, बल्कि राष्ट्र भी प्रगति के पथ पर अग्रसर होता है। सच्चा परिवर्तन उम्र से नहीं बल्कि सोच, साहस और आत्मविश्वास से जन्म लेता है। युवाओं के हाथों में अपारशक्ति होती है और उनके विचार समाज को नई दिशा देने की क्षमता रखते हैं। आज का युवा ही कल का नेतृत्व करता है और अपनी मेहनत से इतिहास रचता है। किंतु जब कोई युवा अपने भविष्य को गलत रास्तों, आलस्य ,निराशा में नष्ट कर देता है, तो वह केवल अपने सपनों को नहीं, बल्कि देश की उम्मीदों को भी तोड़ देता है। युवा राष्ट्र के रीढ़ होते हैं और उनके पतन से समाज की प्रगति रुक जाती है। इसलिए युवा का स्वयं को संवारना केवल व्यक्तिगत दायित्व नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति कर्तव्य है। स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रेरित होकर यदि युवा ज्ञान, चरित्र, अनुशासन और सेवा के मार्ग पर चले, तो न केवल उसका अपना भविष्य उज्जवल होगा, बल्कि देश भी सशक्त, आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाकर विश्व में सम्मान का स्थान प्राप्त करेगा।

2. राष्ट्रीय युवा दिवस पर निशी रस्तोगी कहती हैं कि आज का भारत युवा है, ऊर्जावान है और आत्मविश्वास के साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। युवा दिवस पर हमारा संकल्प है कि हम अपने आसपास के हर व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करेंगे। चाहे वह प्रयास छोटा ही क्यों न हो। क्योंकि छोटे-छोटे प्रयास से मिलकर बड़े और स्थाई बदलाव रचते हैं। स्वामी विवेकानंद ने सदा युवाओं की क्षमता और निष्ठा पर विश्वास किया। वे जानते थे कि सही प्रेरणा और मार्गदर्शन से ही वह पूरे विश्व को सकारात्मक दिशा में मोड़ सकते हैं। युवाओं की अद्वितीय रचनात्मकता तथा सामर्थ्य के प्रति वे आग्रही और उत्साही थे। वे बाहें फैला कर देश के युवाओं को आलिंगनबद्ध करने के लिए उत्सुक रहे। उनका कहा गया हर शब्द शाश्वत अमृत तुल्य है जो हमें किसी भी सामाजिक समस्या से उबारने में सहायक है।

3. युवा दिवस पर रंजना कहती हैं कि हम लोग और हमारे आने वाली जो पीढ़ी है वह अगर विचारधारा में परिवर्तन कर थोड़ा बहुत भी विवेकानंद के विचारों को अपना लें तो भारत के विकास और उन्नति में बहुत सहयोग हो सकता है इसके लिए विवेकानंद के विचारों को उनकी बातों को जो स्कूल के सब्जेक्ट होते हैं उसमें रखना चाहिए ताकि हमारी जो आने वाली जनरेशन है बच्चे हैं वह जान सके कि कौन है विवेकानंद। और शिकागो में उनका जो पहले अमेरिका में उनका जो भाषण था संभाषण उन्होंने तैयार किया था बोलने का मौका नहीं दिया था अंग्रेजों ने। एक नीति अपनाई थी की युवा को हम बोलने नहीं देंगे लेकिन उन्होंने अपने विचारों से ऐसा प्रभाव छोड़ा की वहां की बैठी हुई जनता पर जो उपदेश उनका सुनने को बैठे हुए थे की वह अंग्रेज रोक नहीं पाए और पब्लिक ताली बजा बजाकर उनका जय घोष कर रही थी विवेकानंद जी के बारे में यही विचार है कि काफी सिद्ध पुरुष थे जिससे हमें सीखना चाहिए वह किस तरह इंसान की मानवता की सेवा की बात करते थे उनके सहयोग से अगर आज हम कुछ थोड़ा बहुत उनके विचारों पर चलें तो देश का क्या राष्ट्र का विकास हो सकता है।

4. मथुरा के अंश का कहना है कि युवा शब्द का स्मरण करने से ही शक्ति, जिम्मेदारी, आत्मबल एवं ऊर्जा का एहसास होता है। ऐसे में हमारे देश का भविष्य कहे जाने वाले युवाओं के लिए स्वामी विवेकानंद, भगत सिंह, डॉ एपीजे अब्दुल कलाम जैसे अन्य देशभक्त प्रेरणादाई साबित हुए हैं और उनके आदर्शो पर चलने वाले प्रत्येक युवाओं को अपने कार्यक्षेत्र में सफल पाया गया है। हमारे प्रधानमंत्री जी द्वारा भी हमारे देश के युवाओं को बढ़ावा देने के लिए तथा उनकी नव ऊर्जा के सही प्रयोग के लिए हमारे युवाओं को टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अर्थशास्त्र तथा उद्यमशीलता के क्षेत्र में सफल होने के हेतु कौशल किया जा रहा है। परंतु हर सिक्के के दो पहलू होते हैं ऐसे में हर युवा वर्ग मे यह पाया गया है कि अपने आप में कौशल न लाकर बेरोजगार पाया जाता है और सिर्फ सरकार को तथा लोकतंत्र को धिक्कारता है। ऐसे में उनमें दूसरों को देने को ज्ञान की भरमार पाई जाती है परंतु स्वयं पर लागू करने के समय वह ज्ञान मानो विलुप्त हो जाता है। ऐसे में एक संस्कृत का वाक्य बोला जाता है वीर भोग्या वसुंधरा जिसका अर्थ बताता है कि साहसी और पराक्रमी लोग ही संसार में सफलता और सम्मान प्राप्त करते हैं और उस सम्मान को प्राप्त करने के लिए हमारे अंदर समय के अनुसार कौशलता प्राप्त करना अति आवश्यक है। युवा दिवस के पावन अवसर पर मैं अपनी शब्दावली के माध्यम से इस देश के हैं युवा को एक ही संदेश देना चाहता हूं कि परिश्रम, आत्मविश्वास और अनुशासन का सम्मेलन ही सफलता की पहली सीढ़ी है और इसके पालन से स्वयं हमारा कौशल हमें इस मुकाम पर पहुंचा सकता है जिससे हम भारत देश के लाल के रूप में जाने जाएं।

5. सुप्रसिद्ध कत्थक नृत्यांगना मंजू मलकानी कहती हैं कि दिल और दिमाग से युवा बने रहना जरूरी है मेरे ख्याल से बात चाहे शिक्षा की हो या सेहत की हमारा मकसद प्रदेश को खुशहाल बनाना है हमारा देश व प्रदेश भावनाओं से जुड़ा है और यह जुड़ाव बनाए रखना हम सब की जिम्मेदारी है। स्वामी विवेकानंद एक महान आध्यात्मिक गुरु और विचारक थे। वे बचपन से ही बुद्धिमान और आध्यात्मिक विचारों वाले थे उनकी गहरी रुचि, धर्म ,दर्शन और पश्चिमी विज्ञान में भी थी। वह मानव की मदद करना अपनी मानवता को सिद्ध करना इसी को पूजा या प्रार्थना मानते थे। यही उनकी भक्ति थी जिन्होंने भारत के दर्शन, योग और राष्ट्रवाद को विश्व में फैलाया।

6. युवा दिवस के अवसर पर अभिनेता एवं समाजसेवी रतन शर्मा ने देश के युवाओं को एक प्रेरक संदेश देते हुए कहा कि आज का युवा वर्ग केवल अपने सपनों तक सीमित न रहे, बल्कि अपने देश और समाज की जिम्मेदारी को भी समझे। उन्होंने कहा कि युवाओं का जोश और ऊर्जा यदि सही दिशा में लगाई जाए, तो देश को प्रगति के शिखर पर पहुंचाया जा सकता है। वह बताते हैं कि अपने उत्साह के साथ-साथ अपने देश को भी सदैव याद रखें। देश के लिए कार्य कर रहे लोगों का समर्थन करें और समाज को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दें। हम सब मिलकर एक मजबूत और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं। आजकल भाग दौड़ की जिंदगी में अपने परिवार को कभी ना भूले। आगे बढ़ते हुए ऐसा कार्य करें जिससे न केवल व्यक्ति को सफलता मिले, बल्कि परिवार का नाम रोशन हो और उनका भविष्य सुरक्षित रहे। आज का युवा यदि राष्ट्रहित, समाज सेवा और पारिवारिक मूल्यों के साथ आगे बढ़े, तो भारत का भविष्य उज्जवल होने से कोई नहीं रोक सकता।
प्रस्तुति- विवेक कुमार









