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नरवणे विवाद का साइड इफेक्ट, बड़े अफसरों के किताब लिखने पर लग सकती है रोक

नई दिल्ली। मोदी सरकार जल्द ही बड़े सरकारी अधिकारियों पर रिटायरमेंट के ठीक बाद किताब लिखने पर रोक लगा सकती है। यह रोक रिटायरमेंट के बाद 20 साल तक के टाइम पीरियड के लिए हो सकती है। यह दावा एक रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल नरवणे की किताब पर मचे बवाल के बाद सरकार ने इस तरह का कदम उठाने पर विचार किया है। दरअसल, नरवणे की किताब में अगस्त 2020 में ईस्टर्न लद्दाख में भारत और चीन के बीच हुए सैन्य तनाव के बारे में मोदी सरकार के रवैये के बारे में बहुत कुछ लिखा हुआ है। इसी को लेकर विपक्ष लगातार सरकार से जवाब मांग रहा है। पिछले दो हफ्तों से संसद में लगातार इस पर हंगामा भी हुआ है।

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रिपोर्ट में सरकारी अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में नरवणे की अनपब्लिश बुक से जुड़ा मुद्दा उठाया गया। इस दौरान कई मंत्रियों ने अपनी-अपनी राय दी। उन्होंने कहा कि सीनियर पोजिशन पर रहे अधिकारियों को रिटायरमेंट के बाद तुरंत किताब नहीं लिखनी चाहिए। अधिकारियों ने यह भी बताया कि रिटायर ऑफिसर के लिए 20 साल का कूलिंग ऑफ पीरियड जल्द ही लागू करने को लेकर ऑफिशियल नोटिस जारी किया जा सकता है। इस मामले में सरकार अंतिम फैसला लेने की तैयारी में है। किताब में नरवणे के दावों से मोदी सरकार बैकफुट पर आई। इस किताब को रक्षा मंत्रालय ने अब तक पब्लिश होने की मंजूरी नहीं दी है। राजनाथ सिंह का कहना है कि किताब में कई दावे झूठे हैं, इसलिए किताब को पब्लिश होने से रोका गया। उधर, विपक्ष इस किताब के हवाले से मोदी सरकार और भाजपा की देशभक्ति पर सवाल खड़े कर रहा है।

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