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चित्रकूट के गांव-गांव में होगी मंकी नियंत्रक टीम, वन विभाग ने ग्रामीणों को दिया प्रशिक्षण

बंदरों के आतंक से परेशान ग्रामीणों को बंदरों को पकड़ने के लिए वन विभाग ने दिया प्रशिक्षण

चित्रकूट। जनपद के तमाम गांवों में बंदरों का काफी आतंक है जिससे ग्रामीण काफी परेशान है जिसको लेकर ग्रामीणों ने कई बार वन विभाग के अधिकारियों से बंदरों से निजात दिलाने के लिए गोहर लगाई।जिसको लेकर प्रभागीय वनाधिकारी चित्रकूट प्रत्यूष कटियार ने चित्रकूट के ग्राम प्रसिधपुर, ब्लॉक-पहाड़ी में बंदर नियंत्रण एवं मानव-वन्यजीव संघर्ष न्यूनीकरण हेतु मंकी हैंडलिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया।कार्यक्रम में किसान सभा के अध्यक्ष, विभिन्न ब्लॉकों से ग्राम विकास विभाग के 2-2 प्रतिनिधि, प्रत्येक वन क्षेत्र (Range) से 2-2 प्रतिनिधि सहित संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

इस अवसर पर प्रभागीय वनाधिकारी चित्रकूट द्वारा संबोधित करते हुए बताया गया कि बंदरों की बढ़ती संख्या के कारण किसानों एवं ग्रामीणों को आर्थिक क्षति एवं असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। इसी परिप्रेक्ष्य में जनपद स्तर पर समन्वित कार्ययोजना के अंतर्गत ग्राम पंचायत स्तर पर प्रशिक्षित व्यक्तियों की टीम विकसित की जा रही है।

प्रशिक्षण में मथुरा से आए विशेषज्ञ मोहम्मद आरिफ द्वारा विस्तार से जानकारी दी गई कि—
– बंदरों से स्वयं की सुरक्षा किस प्रकार की जाए,
– बिना किसी हानि पहुँचाए बंदरों को सुरक्षित रूप से कैसे पकड़ा जाए, तथा बचाव एवं नियंत्रण की व्यावहारिक विधियाँ क्या हैं।
उन्होंने मौके पर लाइव प्रदर्शन भी किया तथा व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया।
कार्यक्रम के दौरान यह भी अवगत कराया गया कि अन्य जनपदों से बंदरों को लाकर क्षेत्र के जंगलों में छोड़े जाने की शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। इस विषय पर प्रभागीय वनाधिकारी चित्रकूट प्रत्यूष कटियार द्वारा पुलिस विभाग से समन्वय स्थापित कर आवश्यक रोकथामात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही गई।
बंदर नियंत्रण हेतु रेस्क्यू वैन की व्यवस्था के संबंध में जिलाधिकारी से समन्वय कर आवश्यक निर्णय लिए जाने का प्रयास किया जाएगा।
यह भी स्पष्ट किया गया कि वर्तमान में वन विभाग को बंदर नियंत्रण हेतु पृथक वित्तीय प्रावधान प्राप्त नहीं है तथा शासनादेशानुसार ग्राम पंचायत एवं नगरीय निकायों की भूमिका इस विषय में महत्वपूर्ण है। इस संबंध में उच्च स्तर पर भी विषय को अवगत कराया जाएगा।

भविष्य की कार्ययोजना के अंतर्गत प्रत्येक चयनित ग्राम में स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित “मंकी नियंत्रक ” तैयार किए जाएंगे, जिससे कम लागत में बंदर समस्या का समाधान संभव हो सके तथा स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर भी प्राप्त हो सकें।

रिपोर्ट – वीरेंद्र शुक्ला चित्रकूट

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