
नई दिल्ली। अब अदालतों में बार-बार तारीख लेने की आदत पर सख्त लगाम लगने वाली है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई टालने के नियमों को कड़ा करते हुए साफ कर दिया है कि अब ‘तारीख पे तारीख’ का दौर लगभग खत्म होगा और सिर्फ बेहद जरूरी हालात में ही सुनवाई टाली जाएगी। कोर्ट की ओर से जारी सर्कुलर में कहा गया है कि पहले के 29 नवंबर, 2025 और दो दिसंबर, 2025 वाले निर्देशों की जगह अब नया नियम लागू होगा। इसके तहत अलग-अलग तरह के मामलों के लिए अलग नियम तय किए गए हैं। सबसे सख्त फैसला ‘रेगुलर मामलों’ को लेकर है। इन मामलों में अब किसी भी तरह का एडजर्नमेंट नहीं दिया जाएगा यानी केस लिस्टेड है तो बिना किसी बहाने के सुनवाई होगी। वहीं ‘फ्रेश’ और ‘आफ्टर-नोटिस’ मामलों में भी छूट सीमित कर दी गई है। अगर किसी पक्ष को सुनवाई टालनी है, तो उसे पहले से दूसरी पार्टी को इसकी जानकारी देनी होगी और इसका सबूत भी देना होगा।
यह प्रक्रिया सुनवाई से एक दिन पहले सुबह 11 बजे तक पूरी करनी होगी। सर्कुलर के मुताबिक, सिर्फ असाधारण परिस्थितियों में ही तारीख मिलेगी। जैसे परिवार में किसी की मौत, गंभीर बीमारी या कोई और ठोस और वास्तविक कारण, जिसे कोर्ट संतोषजनक माने। इसके अलावा बार-बार तारीख लेने पर भी रोक लगा दी गई है। फ्रेश मामलों में एडजर्नमेंट की अर्जी सिर्फ एक बार ही दी जा सकेगी। साथ ही, लगातार दो बार सुनवाई टालने की अनुमति नहीं होगी। चाहे मांग किसी भी पक्ष ने की हो। कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि एडजर्नमेंट की अर्जी तय फॉर्मेट ही देनी होगी और इसे तय ईमेल आईडी पर भेजना होगा।









