
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार से पूछा कि जो लोग भगवान अयप्पा के भक्त नहीं हैं, वे केरल के सबरीमाला मंदिर की परंपराओं को कैसे चुनौती दे सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे पर सात सवाल तय किए हैं। इनमें से एक सवाल यह है कि क्या कोई व्यक्ति, जो किसी धार्मिक संप्रदाय या समूह से संबंधित नहीं है, उस धार्मिक संप्रदाय या समूह की किसी प्रथा को जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दे सकता है। जस्टिस बीवी नागरत्ना ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि सबरीमाला मामले में याचिकाकर्ता कौन थे। मूल याचिकाकर्ता भक्त नहीं थे। किसी भी भक्त ने इस प्रथा को चुनौती देने के लिए अदालत का रुख नहीं किया, तो फिर ये रिट याचिकाकर्ता कौन हैं, जो इसे चुनौती दे रहे हैं।
मेहता ने जवाब दिया कि मूल याचिकाकर्ता ‘इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन’ नामक वकीलों का एक संगठन है। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि वे भक्त नहीं हैं, लेकिन हमें यह स्पष्ट करना होगा। क्या भगवान अयप्पा का कोई भी भक्त इस परंपरा को चुनौती देते हुए रिट याचिका दायर कर सकता है और यदि कोई गैर-भक्त, जिसका उस मंदिर से कोई संबंध नहीं है, इसे चुनौती देता है, तो क्या यह अदालत ऐसी याचिका पर सुनवाई कर सकती है।









