नव वर्ष (2026) विशेष: कुछ खास लोगों के लिए नए वर्ष के मायने

प्रस्तुति -विवेक कुमार
नए वर्ष पर परिचर्चा –
नए साल की नई भोर का आपके लिए नई उम्मीदें, नई उमंग, नया जोश, बाल सूर्य अपनी असीम ऊर्जा लेकर आपके पास इस आस्वस्ती के साथ आया है जो उसने पिछले वर्ष की तमाम सुबह और तमाम रातों को सजा संवारकर पेश किया था जगमग तारों से आच्छादित पूर्णिमा के चांद की पूर्णता का दर्शन भी करता रहा है। यह कोई नई बात नहीं है यह तो प्रकृति का नित् नूतन श्रृंगार है जो हर भोर में हमें मिलता है और गहन अंधकार की रात्रि के बाद नई उम्मीदों का सवेरा लेकर आता है यह आशा से हमें हमारे जीवन को उल्लास से भर देता है और एक अनूठा आत्मविश्वास हर एक जीवन में पैदा करता है इस पूरे कालखंड को हम समेट नहीं सकते लेकिन एक-एक साल के छोटे-छोटे टुकड़ों में हर वर्ष इसकी झलक हमें देखने को मिलती ही है। इन्हीं उम्मीदों को लेकर हमने समाज के कुछ गुणीजन से चर्चा कर उनके विचार जानने की कोशिश की….

1. सचिवालय की डिप्टी सेक्रेटरी सारिका भटनागर बतातीं हैं कि नया वर्ष जब भी आता है अपने साथ ढ़ेर सारी उम्मीदें लेकर आता है यह उम्मीदें ही है जो हम सबके मन की भाग्य को पुष्पित पल्लवित रखती है। मेरे मन में भी कई उम्मीदें हैं जो 2026 में साकार होते देखना चाहती हूं पहला यह कि उत्तर प्रदेश उत्तम प्रदेश से सर्वोत्तम प्रदेश बने। दूसरी यह कि मेरा भारत दिन दूनी रात चौगुनी उन्नति करें। और संपूर्ण विश्व के लिए प्रेरणा स्रोत बने। तीसरी यह की भारत का प्रत्येक व्यक्ति खुद से जुड़ना सीखे। अक्सर लोग यह भी नहीं समझ पाते कि आखिर वह चाहते क्या हैं जब वह खुद की भावनाओं को नहीं समझ पाते तो दूसरों की भावनाओं को कैसे समझेंगे। और यही खुद से जुड़ने की छोटी सी पहल है। चाहे पूरे दिन में 5 मिनट ही सही आपके जीवन को निराशा के अंधकार के स्थान पर खुशियों की राह दिखा सकती है ऐसा मेरा विश्वास है। मैं अपनी इन तीनों उम्मीदो के साथ नए साल में कदम रखकर उनको पूरी होते देखना चाहती हूं।

2. मनोवैज्ञानिक डॉक्टर रश्मि सक्सेना नए वर्ष के अवसर पर बताती हैं कि जीवन किसी प्रतिस्पर्धा को जीतने का नाम नहीं है बल्कि स्वयं को समझने की एक निरंतर प्रक्रिया है। नया वर्ष हमसे यह अपेक्षा नहीं करता कि हम तुरंत स्वयं को बदल लें, बल्कि यह हमें धीरे-धीरे आगे बढ़ने और सीखने का अवसर देता है। अपने मन के प्रति संवेदनशील रहे और अपनी भावनाओं के साथ धैर्य रखें क्योंकि आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन समय के साथ विकसित होते हैं। कभी-कभी रुकना, विश्राम करना और अपने भीतर झांकना आवश्यक होता है और इसके लिए स्वयं को दोषी ठहराने की आवश्यकता नहीं है। इस वर्ष अपने मन की आवाज को ध्यान से सुने, अपनी भावनाओं को बिना आलोचना स्वीकार करें और अपनी सीमाओं को पहचानते हुए स्वस्थ सीमाएं निर्धारित करें। सहायता लेना कमजोरी नहीं बल्कि स्वयं के प्रति जागरूकता और साहस का प्रतीक है छोटे-छोटे सकारात्मक कदम-जैसे तनाव के स्थान पर शांति चुनना, आत्म आलोचना के बजाय आत्म देखभाल अपनाना और निराशा के बजाय आशा बनाए रखना-धीरे-धीरे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। यह नव वर्ष आपके जीवन में मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन, आंतरिक शक्ति और आत्म करुणा लेकर आए क्योंकि आपका मानसिक स्वास्थ्य हर दिन महत्वपूर्ण है।

3. वाराणसी की गायिका केशवी शर्मा का कहना है कि नया वर्ष कोई जादू की तारीख नहीं है यह एक नया अवसर है- खुद को थोड़ा समझने का। उम्मीदें बहुत भारी नहीं होनी चाहिए, बस इतनी की दिल हल्का रहे और कदम चलते रहें। उम्मीद कि हम खुद से ईमानदार रहेंगे। उम्मीद कि हर दिन बेहतर नहीं, पर सच्चा होगा। उम्मीद कि तुलना कम होगी, स्वीकार ज्यादा। उम्मीद कि गलतियों से हार नहीं, सीख लेंगे। उम्मीद कि खुशियां छोटी होगी पर रोज होंगी। नया साल यह वादा नहीं करता की सब आसान होगा, पर यह भरोसा जरूर देता है कि हम मजबूत होंगे। इसलिए नए वर्ष से चमत्कार नहीं, बस सुकून, संतुलन और साहस की उम्मीद रखें। यही सबसे सुंदर शुरुआत है।

4. अमीनाबाद के सूर्य प्रकाश पाठक का कहना है कि प्रत्येक 25 दिसंबर से 5 जनवरी तक पूरा विश्व एक अलग उत्साह में होता है एक नई ऊर्जा के साथ। हम अपनी बुरे अनुभवों से कुछ सीखें और आगे बढ़े। संभवतः प्रकृति हमें यही संदेश देती है इस माध्यम से। हमें ठहरना नहीं है आगे बढ़ना है और बढ़ते ही जाना है जो हमारे पास आज है हमें उसका उत्सव मनाना है और जो खो गया उसके लिए दुखी नहीं होना है। यही नव वर्ष के उत्सव का संदेश है। यद्यपि हम भारतीयों के अपने उत्सव प्राकृतिक रूप में सिद्ध एवं वैज्ञानिक होते हैं। वह होली हो, भारतीय नव वर्ष हो, दीपावली हो सभी उत्सवों में प्रकृति भी हमारे साथ उत्सव मनाती प्रतीत होती है तदापि वसुधा को कुटुंब और प्रत्येक जीव में सियाराम को देखने वाला भारतीय क्रिसमस और अंग्रेजी नव वर्ष भी उसी उत्साह से मानता दिखाई देता है यदि ध्यान से देखें तो यह मात्र मानव को इस स्ट्रेस भरे जीवन में खुशी के पल देता है जो उसमें पुनः शक्ति का संचार कर देता है।

5. गोमती नगर के अशोक कुमार बताते हैं कि नए वर्ष में एक दूसरे की मदद करें और एक दूसरे से प्यार करें और जहां तक हो दूसरे की सहायता करें और किसी को बेवकूफ ना बनाएं छोटे लोगों को प्यार दें। बड़े लोगों को स्नेह। देखा जाए तो आजकल हॉबी बिल्कुल खत्म हो गई है कोई हॉबी की बात ही नहीं करता सब पढ़ाई और मोबाइल की ही बात करते हैं मोबाइल के साथ-साथ जीवन का आनंद भी तो लें। जीवन में आनंद लेने की बात होनी चाहिए और बड़ों का सम्मान होना चाहिए। आइए 2026 में हम अपने भीतर की श्रेष्ठता को पहचाने। भय को पीछे छोड़े, आशा को आगे रखें और कर्म को अपना आधार बनाएं। शब्दों से अधिक हमारे कार्य बोलें और सपनों से अधिक हमारे संकल्प सशक्त हो, यही नव वर्ष की सच्ची भावना है-एक ऐसा वर्ष जहां सफलता के साथ संवेदना हो, विकास के साथ संतुलन हो और उपलब्धियों के साथ विनम्रता।

6. प्रयागराज की प्रतिभा पांडे कहती हैं कि वर्ष 2026 हमारे सामने एक ऐसे द्वार की तरह खड़ा है, जो हमें आत्म मंथन, सृजन और संवेदनशीलता की ओर आमंत्रित करता है। बीता हुआ वर्ष हमें अनुभव, संघर्ष और सीख देकर गया। कुछ क्षण स्मृतियों में मुस्कान बनकर रह गए, तो कुछ ने हमें भीतर तक झकझोर कर मजबूत बनाया। अब समय है पुराने बोझ उतार कर, नई सोच के वस्त्र धारण करने का। आइए, इस नव वर्ष में संकल्प लें की मानवता को प्राथमिकता देंगे, कला, संस्कृति और ज्ञान को जीवन का अभिन्न अंग बनाएंगे और आंतरिक शांति का बाह्म सफलता से अधिक महत्व देंगे। यह वर्ष केवल उपलब्धियां का नहीं अर्थपूर्ण जीवन का वर्ष बने, जिसमें प्रगति के साथ प्रकृति, और विकास के साथ मूल्य भी सुरक्षित रहे। नव वर्ष 2026 सबके जीवन में स्वास्थ्य, सृजन, संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आए।

7. एंजेल क्लीनिक की डॉक्टर ज्योति दूबे सभी देशवासियों को नववर्ष 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं देती हैं और ईश्वर से प्रार्थना करती हैं कि 2026 सभी के जीवन में खुशियों की लहर लेकर आए। आप सभी 2026 में स्वस्थ, सफल, सुरक्षित और खुशहाल रहे, जीवन के सबसे बड़े लक्ष्यो को प्राप्त करें और नई ऊंचाइयों को छुएं। कहते हैं स्वास्थ्य ही धन है। इसलिए उत्कृष्ट शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव है कि आप सभी शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ समाज और राष्ट्र में योगदान दे सकें। पर्याप्त नींद ले। कम से कम सात आठ घंटे मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से बचें। दैनिक व्यायाम करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। शरीर में पानी की कमी न होने दें। अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें शरीर में कोई भी असामान्य परिवर्तन होने पर डॉक्टर से परामर्श लें और दवा लें। नियमित रूप से ध्यान और योग करें। अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए प्रतिदिन उचित गतिविधियां और शौक अपनायें।

8. प्लेबैक सिंगर निकिता राय का कहना है कि नया साल जीवन में नई आशाओं, नए सपनों और नई शुरुआत का संदेश लेकर आता है। यह वह समय होता है जब हम बीते हुए साल की अच्छी बुरी यादों को संजोकर, आने वाले साल के लिए नए लक्ष्य तय करते हैं। नया साल हमें आगे बढ़ने और अपने जीवन को बेहतर बनाने की प्रेरणा देता है। हर नया वर्ष हमें अपने अतीत पर विचार करने और भविष्य को बेहतर बनाने का अवसर देता है। नए वर्ष से यह उम्मीद रहती है कि जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आए और हम पिछली गलतियों से सीख लेकर आगे बढ़े। 2026 में लोगों से यह उम्मीद है कि वे केवल तेज प्रगति पर नहीं, बल्कि गुणवत्ता पूर्ण जीवन पर ध्यान दें मानसिक शांति, स्वास्थ्य, रिश्तों और आत्मविश्वास को महत्व दें। तकनीकी के क्षेत्र में आशा है कि नवाचार मानव जीवन को आसान बनाने के साथ-साथ नैतिक और जिम्मेदार भी होगा।

9. लखनऊ विश्वविद्यालय की छात्रा साक्षी दूबे का मानना है कि जीवन में कई ऐसे क्षण आते हैं जब आप अपने मन की व्यथा को किसी के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर पाते, या तो शब्द नहीं मिलते या कोई श्रोता नहीं मिलता। परंतु कभी आपने विचार किया है मानव जीवन की अधिकतर समस्याओं के मूल में बस एक कारण है दूसरे व्यक्तियों के द्वारा आपकी भावनाओं को ना समझे जाना, और विरोधाभास तो देखिए हम उन उलझनों का उत्तर भी किसी अन्य व्यक्ति में ही ढूंढना सार्थक समझते हैं। 2025 एक ऐसा वर्ष रहा जिसमें सभी ने कुछ न कुछ खोया, किसी के अपने छूटे तो किसी के सपने। अस्पष्ट एवं अकथनीय भावनाओं का उदगार लिए आया था 2025, परंतु इस वर्ष ने मानव जीवन में आध्यात्म के महत्व को समझाया है। आध्यात्म के अनुसार आत्म परीक्षण ही एक साधन है आत्म साक्षात्कार का, स्वअवलोकन से ही हम अपनी उलझनों का उत्तर पा सकते हैं, 2025 ने सिखाया कि बाहर का शोर हमें शांति की अनुभूति नहीं देगा, केवल भीतर की आवाज ही आत्मा के कपाट खोल सकती है।

10. श्री दुर्गा जी पीजी कॉलेज आजमगढ़ के प्रोफेसर बृजेश कुमार कहते हैं कि पिछले वर्ष तमाम उपलब्धियों के आधार पर नए साल से और भी उम्मीदें जग गई हैं जो आम जन में विश्वास और सुरक्षा की भावना पैदा कर रही है सबसे बड़ी व्यवस्था कानून व्यवस्था की है माफिया गुंडाराज समाप्त हुआ है बहन, बेटियों का घर से बाहर निकलना सुरक्षित हुआ है। पुलिस और प्रशासन आम जनता के प्रति अति संवेदनशील और जागरूक दिखाई दे रहे हैं। नए-नए कॉलेज, यूनिवर्सिटी, मेडिकल कॉलेज खुलते जाने से, नई एक्सप्रेस वे के निर्माण होने से आम जनता का जीवन सुगम हुआ है रोजी रोजगार के बढ़ने की चौतरफा उम्मीदें जगने लगी हैं आमजन सरकार के आश्रित ना होकर स्वयं के रोजगार के लिए प्रयत्नशील है। सबसे बड़ी बात यह है कि कोई भी योजना कोई भी कार्य जब एक बार तय हो जाए तो उसकी क्रियान्वयन की सतत् निगरानी व जवाबदेही भी तय हो, नई शिक्षा आयोग की स्थापना का भी मैं स्वागत करता हूं मेरा यह कॉलेज बहुत पुराना है जो की 1958 का बना हुआ है जो डीएम साहब के नियंत्रण में चल रहा है और एडीम साहब यहां प्रशासन और सारी व्यवस्थाओं को देख रहे हैं। मैं उम्मीद करता हूं कि आने वाले समय में कॉलेज के जर्जर होती जा रही बिल्डिंग का पुनरुद्धार हो और आज की समय की आवश्यकताओं और भविष्य में यह कॉलेज बच्चों को आने वाले समय के लिए कैसे तैयार करेगा और कैसे हमारे बच्चों का भविष्य उज्जवल होगा और कॉलेज में रहते हुए तकनीकी रोजगार के लिए स्वयं पहल करेंगे ।रोजगार मांगने वाले नहीं रोजगार देने वाले बनेंगे। इस कार्य में प्रशासन साथ ही शिक्षकों ,अभिभावकों और पुराने विद्यार्थियों का सहयोग लेकर यथाशक्ति प्रयास करता रहूंगा। मुझे विश्वास है कि वर्ष 2026 हमारे लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।









