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गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का देश के नाम संदेश

लखनऊ।   गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस का पावन पर्व हमें हमारे अतीत, वर्तमान और भविष्य में देश की दशा और दिशा का अवलोकन करने का अवसर देता है। स्वतंत्रता संग्राम के बल पर 15 अगस्त, 1947 के दिन हमारे देश की दशा बदली। भारत स्वाधीन हुआ और हम अपनी राष्ट्रीय नियति के निर्माता बने। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि 26 जनवरी, 1950 से हमने अपने गणतंत्र को संवैधानिक आदर्शों की दिशा में आगे बढ़ाना प्रारंभ किया. इसी दिन हमारा संविधान पूरी तरह लागू हुआ। इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने महिलाओं के सशक्तिकरण को देश के सर्वांगीण विकास में एक महत्त्वपूर्ण स्तंभ के रूप में मान्यता दी है। उन्होंने यह साफ किया है कि हमारी बहनें और बेटियां परंपरागत रूढिय़ों को तोड़ते हुए हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। देश में दस करोड़ से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने विकास की नई परिभाषा लिखी है, जो यह दिखाता है कि महिलाएं अब खेती-किसानी से लेकर अंतरिक्ष अनुसंधान तक, स्व-रोजगार से लेकर सुरक्षा बलों तक हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। राष्ट्रपति मुर्मू ने विशेष रूप से खेल क्षेत्र में महिलाओं की उपलब्धियों को रेखांकित किया है।

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विश्व स्तर पर हमारी बेटियों ने क्रिकेट और शतरंज जैसे खेलों में नए मानदंड स्थापित किए हैं। पिछले साल नवंबर में, भारत की महिला क्रिकेट टीम ने आईसीसी महिला क्रिकेट विश्व कप और ब्लाइंड महिला टी-20 विश्व कप जीतकर इतिहास रचा। साथ ही, शतरंज विश्व कप के फाइनल मुकाबले में भी भारत की दो बेटियों ने प्रतिस्पर्धा की, जो खेल जगत में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का प्रमाण है। राष्ट्रपति ने कहा कि विश्व पटल पर अनिश्चितता के बावजूद, भारत में निरंतर आर्थिक विकास हो रहा है। हम निकट भविष्य में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के अपने लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

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