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सीनियर डाक्टर हुआ डिजिटल अरेस्ट का शिकार, शातिरों ने 12 दिन में ठग लिए 8 करोड़ रुपए

अहमदाबाद। देश में डिजिटल अरेस्ट के मामले लगतार बढ़ते जा रहे हैं। शातिर लगातार लोगों को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लाखों करोड़ों की ठगी को अंजाम दे रहे हैं। हालांकि सरकार बार बार लोगों को आगाह कर रही है कि डिजिटल अरेस्ट जैसे कोई चीज नहीं होती, ये सिर्फ शातिरों द्वारा बनाया गया ठगी का नया तरीका हैं, बावजूद इसके रोजाना लोग डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी का शिकार हो रहे हैं। ऐसा की एक नया मामला गुजरात के अहमदाबाद में सामने आया है। जहां शातिरों ने एक सीनियर सिटीजन डाक्टर को ED के नाम पर डिजिटल अरेस्ट किया और फिर 12 दिन में 8 करोड़ रुपए ठग लिए। बाद में डाक्टर की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

जानकारी के अनुसार अहमदाबाद के रहने वाले सीनियर सिटीजन डाक्टर की जिंदगी में उस दिन अचानक से उथल पुथल आ गई जब उसे एक WhatsApp पर कॉल आई। कॉल करने वाले शख्स ने रौबदार आवाज में बात करते हुए कहा कि हम मुंबई प्रवर्तन निदेशालय से बोल रहे हैं। आपके खिलाफ गंभीर आरोप हैं। जेट एयरवेज मनी लांड्रिंग स्कैम में आपके बैंक अकाउंट से 5 लाख रुपए जमा हुए हैं। यह सुनकर डाक्टर चौंक गया। कॉल करने वाले शख्स की आवाज में इतना आत्मविश्वास और सख्ती थी कि शक करने की गुंजाइश ही नहीं बची।

कॉल करने वाले शख्स ने कहा कि यदि आपने जांच में सहयोग नहीं किया तो कोर्ट से आपकी 40 दिन की रिमांड ले लेंगे। आपको तुरंत गिरफ्तार किया जाएगा और आपने यह बात किसी को बताई तो आपके खिलाफ देशद्रोह का केस दर्ज होगा। डाक्टर का माथा ठनका और डर ने उनके दिमाग पर कब्जा कर लिया। आरोपियों ने उसी डर का फायदा उठाया और बाजी पलट दी।

उन्होंने डाक्टर से कहा कि आपको दिल्ली बुलाने की जरूरत नहीं। हम आपके लिए ऑनलाइ कोर्ट हायरिंग करवा देंगे। इसके बाद मोबाइल और लैपटॉप पर उन्हें एक वीडियो कॉल पर कार्ज जैसी प्रक्रिया दिखाई गई। वकील, जज और कार्ट स्टाफ के नाम पर एक्टिंग करने वाले लोग थे। इतना ही नहीं उन्हें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के नाम से एक फर्जी लेटर भी भेजा गया। इस पूरे सेटअप ने डाक्टर को यकीन दिला दिया कि मामला असली है।

आरोपियों ने डाक्टर को कहा कि जब तक जांच चल रही है उनके बैंक अकाउंट से पैसे सिक्योरिटी के तौर पर अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने होंगे। पीड़ित डाक्टर ने डर और विश्वास के बीच 12 दिन में 7 अलग अलग बैंक खातों में कुल 8 करोड़ 5 लाख ट्रांसफर कर दिए। उन्हें भरोसा दिलाया गया कि जैसे ही जांच पूरी होगी, आपके सारे पैसे आपको लौटा दिए जाएंगे। ठगी के इस खेल का खुलासा उस समय हुआ जब पुलिस ने एक बैंक खाते की जांच की, जिसमें डाक्टर के 80 लाख रुपए ट्रांसफर हुए थे। वह खाता अहमदाबाद के नारोल इलाके के रहने वाले पप्पू सिंह का निकला। पुलिस फौरन उस जगह जा पहुंची।

पूछताछ में पता चला कि पप्पू ने कमीशन के लालच में अपना बैंक अकाउंट किराए पर दे दिया था। इससे वादा किया गया था कि उसके खाते से जितना पैसा ट्रांसफर होगा उस पर उसे 10% कमीशन मिलेगा। लेकिन उसके खाते से अलग-अलग बैंकों में पैसे ट्रांसफर किए जाने के बाद सिर्फ 780 रुपए ही छोड़े गए, बाकि करोड़ों रुपए तुरंत दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिए गए। आरोपियों ने कमीशन के नाम पर पप्पू को भी ठगी का शिकार बना लिया।

पुलिस पूछताथ में खुलासा हुआ कि इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड विकास कुमार सिंह है। वह बिचौलिए आसिफ के जरिए ऐसे खातों की तलाश में था जिनमें करोड़ों की ट्रांजेक्शन लिमिट हो। असल में विकास टेलीग्राम ऐप के जरिए सीधे कंबोडिया में बैठे साइबर फ्रॉड गैंग के संपर्क में था। यह गांद भारत में डिजिटल अरेस्ट जैसे मामले ऑपरेट करता है। इनके पास कई हाईटेक एप्लीकेशंस हैं, जिनसे कॉल करने पर लोकेशन भारत में ही दिखाई देती है, जबकि कॉल विदेश से आ रही होती है।

पुलिस ने आरोपी विकास कुमार सिंह, बिचौलिया आसिफ और बैंक अकाउंट कमीशन पर देने वाले पप्पू सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि कंबोडिया में बैठे साइबर गैंग तक पहुंचना अभी भी पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है। पुलिस का मानना है कि ऐसे गैंग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करते हैं। वे भात जैसे देशों को निशाना बनाते हैं, जहां डिजिटल पेमेंट तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन साइबर सुरक्षा जागरूकता उतनी मजबूत नहीं है।

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