
नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के उस प्रस्ताव पर सहमति दे दी है, जिसमें पुरी रथ यात्रा के रथों के तीन पहिए संसद परिसर में लगाने का प्रस्ताव है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। एसजेटीए ने एक बयान में कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला के पुरी स्थित श्रीजगन्नाथ मंदिर दौरे के दौरान, प्रशासन ने संसद परिसर में रथ यात्रा के रथों के तीन पहिए लगाने का प्रस्ताव दिया था। बिरला ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। संसद में रथ यात्रा के पहिए लगने के बाद यह परिसर में स्थापित संस्कृति से जुड़ा दूसरा प्रतीक होगा। इससे पहले मई, 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में स्पीकर की कुर्सी के बगल में ऐतिहासिक सेंगोल स्थापित किया था।
अब संसद परिसर में पुरी के रथ यात्रा के पहिए लगाए जाएंगे। यह तीनों पहिए भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और बलभद्रा के रथों से निकाले जाएंगे। भगवान जगन्नाथ के रथ को नंदीघोष, देवी सुभद्रा के रथ को दर्पदलन और भगवान बलभद्र का रथ तालध्वज कहलाता है। इन तीन रथों के एक-एक पहिए दिल्ली भेजे जाएंगे। उन्हें संसद में ओडिशा की संस्कृति और विरासत के स्थायी प्रतीक के रूप में स्थापित किया जाएगा। दरअसल हर साल नई लकड़ी से रथ तैयार किए जाते हैं। अलग किए गए पुर्जों को गोदाम में रखा जाता है और कुछ हिस्से, जिनमें पहिए भी शामिल हैं, नीलामी के जरिए लोगों तक पहुंचते हैं। करीब 200 कारीगर सिर्फ 58 दिनों में 45 फुट ऊंचे और 200 टन से ज्यादा वजनी इन तीन रथों को तैयार करते हैं। खास बात यह है कि रथ निर्माण में पांच तरह की विशिष्ट लकडिय़ों का इस्तेमाल होता है और लकड़ी नापने के लिए स्केल की जगह पारंपरिक छड़ी का उपयोग किया जाता है।