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कल सूरज के सबसे करीब होगी पृथ्वी, फिर भी गर्मी नहीं? जानिए रहस्य

मेरठ। 3 जनवरी यानी कल पृथ्वी सूर्य से 147,103,637 किलोमीटर की दूरी पर होगी, जो उसकी पूरी परिक्रमा के दौरान सबसे कम दूरी है और इसकी अधिकतम दूरी से करीब 50 लाख किलोमीटर कम है। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के प्रति कुलपति एवं गणित विभाग में वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. मृदुल गुप्ता ने स्पष्ट किया कि सूर्य के सबसे करीब होने के बावजूद पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध का सर्दियों में होना अकसर सहज बोध को भ्रमित करता है। आमतौर पर यह सवाल उठता है कि यदि पृथ्वी सूर्य के सबसे पास होती है, तो यह वर्ष का सबसे गर्म समय क्यों नहीं होता? इसका कारण दूरी नहीं, बल्कि पृथ्वी का अपनी धुरी पर 23.5 डिग्री का झुकाव है, जो मौसम को सूर्य से दूरी की तुलना में कहीं अधिक प्रभावित करता है।

 

डॉ. गुप्ता के अनुसार कैलेंडर इसलिए प्रभावी होते हैं, क्योंकि हम सभी सामूहिक रूप से उन पर सहमत होते हैं। जब पूरी दुनिया एक ही समय पर साल के खत्म होने और शुरू होने में विश्वास करती है, तो उस विश्वास को सामाजिक शक्ति मिलती है। लोग एक साथ नई योजनाएं बनाते हैं, पुराने मतभेद भूलते हैं और उम्मीद के साथ आगे बढ़ते हैं। इसी साझा ठहराव में उत्सव का आनंद निहित होता है, जबकि सौर टर्निंग प्वाइंट (निर्णायक पड़ाव) अक्सर नजरअंदाज रह जाता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य वास्तव में दो घडिय़ों के साथ जीता है, एक इंसान द्वारा बनाई गई, जो डेडलाइन, शेड्यूल और रिमाइंडर से चलती है और दूसरी ब्रह्मांडीय, जो गति और गुरुत्वाकर्षण से संचालित होती है। हम अकसर पहली घड़ी पर भरोसा करते हैं और दूसरी को भूल जाते हैं, जबकि हमारा शरीर, मौसम और ग्रह अब भी उसी प्राचीन लय का अनुसरण करते हैं। एक घड़ी जीवन को व्यवस्थित करती है, दूसरी हमें अंतरिक्ष में हमारी वास्तविक स्थिति का एहसास कराती है। डॉ. मृदुल गुप्ता का कहना है कि सूरज कोई निमंत्रण नहीं भेजता और पृथ्वी तालियों का इंतज़ार नहीं करती। वह क्षण आता है, अपना काम करता है और आगे बढ़ जाता है। शायद यही इसका सबसे बड़ा संदेश है, हर शुरुआत काउंटडाउन के साथ नहीं आती और हर नवीनीकरण को नाम देने की ज़रूरत नहीं होती। उन्होंने कहा कि कभी-कभी सबसे अर्थपूर्ण नया साल वही होता है, जो तब भी घटित होता है, जब हम उसे देख रहे हों या नहीं। वह हमें याद दिलाता है कि हम केवल कैलेंडर की तारीखों से नहीं गुजर रहे, बल्कि एक जीवित ग्रह पर अंतरिक्ष की यात्रा कर रहे हैं, एक तारे के चारों ओर घूमते हुए, समय की गिनती से कहीं पुरानी कहानी का हिस्सा बनकर। यह एहसास किसी जश्न का नहीं, बल्कि एक दुर्लभ चीज़ की मांग करता है और वह है हमारा ध्यान।

 

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