
मेंगलुरु। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) की एक महत्वपूर्ण खेप लेकर आया एलपीजी पोत अपोलो ओशन गुरुवार को न्यू मंगलौर बंदरगाह पहुंच गया। अधिकारिक सूत्रों ने कहा कि इस खेप से कर्नाटक और पड़ोसी दक्षिणी राज्यों को एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होने की उम्मीद है। बंदरगाह अधिकारियों ने पुष्टि करते हुए कहा कि सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल के अंतर्गत माल उतारने का काम तुरंत शुरू किया जाएगा। अपोलो ओशन का आगमन अमेरिका और रूस से हाल ही में हुई एलपीजी और कच्चे तेल की कई खेपों की प्राप्ति के बाद हुआ है जो वैश्विक व्यवधानों के बावजूद घरेलू ईंधन आपूर्ति को सुरक्षित रखने के भारत के प्रयासों को दर्शाता है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “अंतर्राष्ट्रीय तनाव बढ़ने के बावजूद, हमारे बंदरगाह का संचालन सुचारू रूप से जारी है और उपभोक्ताओं को एलपीजी की उपलब्धता के बारे में चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।” अधिकारियों ने इस बात पर बल दिया कि सुरक्षित डॉकिंग, अनलोडिंग और वितरण के लिए सभी प्रक्रियाएं लागू हैं, जो रणनीतिक ऊर्जा शिपमेंट को संभालने के लिए बंदरगाह की तत्परता की पुष्टि करते हैं।
उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने कहा है कि एलपीजी और कच्चे तेल की निरंतर आपूर्ति दक्षिण भारत की ऊर्जा सुरक्षा केंद्र के रूप में न्यू मंगलौर बंदरगाह के रणनीतिक महत्व को दर्शाती है। यह बंदरगाह यह सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण बिंदु बन गया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में व्यवधान से घरेलू आपूर्ति बाधित न हो सके।
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के मद्देनजर अस्थिर माल ढुलाई और ईंधन बाजारों के बीच भारत में माल ढुलाई का सुचारू संचालन एक राहत के रूप में देखा जा रहा है जबकि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हुई हैं। आने वाले हफ्तों में कई और जहाजों के आने की संभावना के मद्देनजर कर्नाटक और पड़ोसी राज्यों में घरों एवं उद्योगों दोनों के लिए ईंधन की निरंतर आपूर्ति होने की उम्मीद है।









