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देश में कहीं भी पेट्रोल, डीज़ल या एलपीजी की कोई कमी नहीं, दो माह के लिए है पर्याप्त तेल- पेट्रोलियम मंत्रालय

नई दिल्ली। पेट्रोलियम मंत्रालय ने रसोई गैस सहित देश में जरूरी पेट्रोलियम उत्पादों की कमी का तथ्यों के साथ खंडन करते हुए कहा है कि कुछ तत्व जनता को भ्रमित करने के लिए गलत सूचनाएं फैला रहे हैं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने गुरुवार को साफ तौर पर कहा कि भारत में पेट्रोलियम और एलपीजी की आपूर्ति की स्थिति पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रण में है। मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति में कहा कि खाड़ी में जारी युद्ध के चार सप्ताह हो रहे हैं फिर भी देश में दो माह के लिए पर्याप्त तेल है। इसके अलावा देश में दैनिक कुल एलपीजी की मांग के 60 प्रतिशत हिस्से का देश में ही उत्पादन हो रहा है तथा बाकी एलपीजी की आपूर्ति विदेशी स्रोतों से निरंतर हो रही है।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा, ‘रिटेल फ्यूल आउटलेट्स पर पर्याप्त मात्रा में ईंधन उपलब्ध है। देश में कहीं भी पेट्रोल, डीज़ल या एलपीजी की कोई कमी नहीं है।” मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि कि वे जान-बूझकर फैलाई जा रही गलत सूचनाओं के एक शरारती और सुनियोजित अभियान से गुमराह न हों। मंत्रालय ने कहा है कि कुछ पंपों पर घबराहट में खरीदारी की जो इक्का-दुक्का घटनाएं सामने आईं, वे सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो के ज़रिए जान-बूझकर फैलाई गई गलत सूचनाओं की वजह से हुईं है। भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनरी केंद्र है और पेट्रोलियम उत्पादों का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक है, जो 150 से ज़्यादा देशों को रिफाइंड ईंधन की आपूर्ति करता है। सरकार का कहना है कि चूंकि भारत दुनिया के लिए एक शुद्ध निर्यातक है, इसलिए घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीज़ल की उपलब्धता व्यवस्थित रूप से सुनिश्चित है।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि देश भर में एक लाख से ज़्यादा रिटेल फ्यूल आउटलेट्स बिना किसी रुकावट के ईंधन की आपूर्ति कर रहे हैं और कहीं कोई कटौती नहीं की गयी है। मंत्रालय ने कहा है, ”अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति भारतीय तेल कंपनियों द्वारा पहले ही सुनिश्चित कर ली गई है। आपूर्ति में कोई कमी नहीं है। भारत के पास कुल 74 दिनों की रिज़र्व क्षमता है और अभी वास्तविक स्टॉक लगभग 60 दिनों का है । इसमें कच्चे तेल का स्टॉक, उत्पादों का स्टॉक और भंडार के लिए जमीन में बनाए गये गढ्ढों में रखे तेल के स्टॉक शामिल हैं, जबकि पश्चिम एशिया संकट का आज 27वां दिन है।”

 

मंत्रालय ने कहा है कि देश में एलपीजी उत्पादन 50 हजार टन तक पहुंच गया है जो हमारी कुल ज़रूरत का 60 प्रतिशत से ज़्यादा है। देश में एलपीजी की कुल दैनिक ज़रूरत लगभग 80 हजार टन है। घरेलू उत्पादन के अलावा, आठ लाख टन एलपीजी की की सुनिश्चित खेप पहले ही बुक कर ली गई है और अमेरिका, रूस, ऑस्ट्रेलिया तथा अन्य देशों से भारत के लिए रवाना हो चुकी है। ये खेप भारत के 22 एलपीजीआयात टर्मिनलों पर पहुंचेंगी । यह संख्या 2014 में मौजूद 11 टर्मिनलों की संख्या से दोगुनी है।

मंत्रालय ने कहा कि एलपीजी की ” पूरे एक महीने की आपूर्ति की व्यवस्था पक्के तौर पर कर ली गई है, और अतिरिक्त खरीद को लगातार अंतिम रूप दिया जा रहा है। तेल कंपनियां हर दिन 50 लाख से ज़्यादा सिलेंडरों की सफलतापूर्वक आपूर्ति कर रही हैं। उपभोक्ताओं द्वारा घबराहट में की गई ज़्यादा मांग के कारण सिलेंडरों की मांग बढ़कर 89 लाख तक पहुँच गई थी, जो अब फिर से घटकर 50 लाख सिलेंडरों पर आ गई है।”

सरकार के अनुसार जमाखोरी या कालाबाज़ारी को रोकने के लिए, राज्य सरकारों के परामर्श से कमर्शियल सिलेंडरों का आवंटन बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है। मंत्रालय ने इस दावे को गलत बताया है कि एलपीजी की कमी के कारण पीएनजी को बढ़ावा दिया जा रहा है, एक गलत जानकारी है।

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