
नई दिल्ली। चीफ और डिफेंस स्टॉफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने भारत और चीन के बीच हुए पंचशील समझौते को लेकर अपनी राय रखी है। सीडीएस ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा 1954 में किए गए इस समझौते के तहत भारत ने आधिकारिक रूप से तिब्बत को चीन के हिस्से के रूप में स्वीकार कर लिया था। सीडीएस ने कहा कि इस समझौते के बाद भारत को लगा कि उत्तरी सीमा के विवाद का निपटारा हो गया है, लेकिन चीन ने इसे केवल एक व्यापारिक समझौता माना। जनरल चौहान ने बताया कि भारत ने 1954 में तिब्बत को चीन के हिस्से के रूप में मान्यता दे दी थी।
इसके पीछे भारत की धारणा थी कि पंचशील समझौते पर हस्ताक्षर करने से उत्तरी सीमा का विवाद औपचारिक संधि के जरिए सुलझ जाएगा, लेकिन चीन की नीयत अलग थी। उसने स्पष्ट कर दिया कि यह समझौता केवल व्यापार के लिए था। सीमा पर उसके रुख से इसका कोई लेना-देना नहीं था। यह भारत का एक ऐसा कूटनीतिक अनुमान था, जिसका खामियाजा देश आज भी भुगत रहा है।









