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7 साल से सरकारी आदेशों को पैरों तले रौंद रहा पीपीगंज नगर पंचायत , 2 निदेशकों और नगर विकास विभाग के कड़े निर्देश भी हवा में उड़े
₹55,000 के वैध विज्ञापन भुगतान पर कुंडली मारकर बैठे अधिकारी, 2017 से विज्ञापनों का भुगतान पिछले कई वर्षों से अटका हुआ है
पीपीगंज, गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के स्थानीय निकायों में प्रशासनिक हठधर्मिता और सरकारी आदेशों की अवहेलना का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। नगर पंचायत पीपीगंज द्वारा मीडिया संस्थान ’24 टुडे न्यूज़’ को जारी किए गए विज्ञापनों का भुगतान पिछले कई वर्षों से अटका हुआ है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस मामले में उत्तर प्रदेश शासन के नगर विकास विभाग (अनुभाग-9) और नगरीय निकाय निदेशालय, लखनऊ द्वारा बार-बार लिखित आदेश दिए जाने के बावजूद स्थानीय अधिकारी इस पर कुंडली मारकर बैठे हैं।


क्या है पूरा मामला?
प्राप्त दस्तावेजी साक्ष्यों के अनुसार, यह विज्ञापन वर्ष 2017 में 24 टुडे न्यूज़ के तत्कालीन गोरखपुर ब्यूरो प्रमुख अनुराग श्रीवास्तव (अनुराग सूर्यवंशी) द्वारा लाया गया था। नगर पंचायत पीपीगंज के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी (EO) द्वारा मासिक पत्रिका ’24 टुडे न्यूज़’ को क्रमशः ₹15,000 (आर.ओ. संख्या 312(iiii)/न०पं० पीपीगंज/2017) और ₹40,000 (आर.ओ. संख्या 457/न०पं० पीपीगंज/2017) के दो आधिकारिक रिलीज ऑर्डर जारी किए गए थे। मीडिया संस्थान ने इन विज्ञापनों को पूरी निष्ठा के साथ अपनी पत्रिका में प्रकाशित और प्रसारित किया।
विज्ञापन प्रकाशन के बाद संस्थान द्वारा बिल, मूल रिलीज ऑर्डर (RO) और प्रकाशित पत्रिका की प्रतियों समेत सभी साक्ष्य नगर पंचायत कार्यालय में जमा करा दिए गए थे, जिनकी आधिकारिक रिसीविंग (प्राप्ति साक्ष्य) आज भी संस्थान के पास सुरक्षित है।
पूर्व और वर्तमान निदेशकों के आदेशों की भी उड़ीं धज्जियां
संस्थान के विपणन प्रमुख श्री एस.के. सिंह द्वारा लगातार किए गए पत्राचार के बाद शासन और निदेशालय स्तर से पीपीगंज प्रशासन को कई बार कड़े निर्देश जारी किए गए:
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- वर्ष 2019 में तत्कालीन निदेशक डा० काजल ने पत्र संख्या 150/स्टोर/विज्ञापन/2019 के माध्यम से पीपीगंज प्रशासन को बिलों का परीक्षण कर एक सप्ताह के भीतर भुगतान कराने और निदेशालय को अवगत कराने का आदेश दिया था।
- मार्च 2023 में वर्तमान निदेशक नेहा शर्मा ने पत्र संख्या 8/2150/142(2)/सा०दि०नि०/2014-15 के जरिए पुनः कड़ा रुख अपनाते हुए अधिशासी अधिकारी को ‘अविलंब भुगतान सुनिश्चित कराने’ का निर्देश दिया, जिसकी प्रतिलिपि विशेष सचिव, नगर विकास अनुभाग-9, उ०प्र० शासन को भी आवश्यक कार्यवाही हेतु भेजी गई थी।



पत्रिका में प्रकाशित विज्ञापन
पत्रिका में प्रकाशित विज्ञापन
अधिकारी बदल गए, पर नहीं बदला अड़ियल रवैया
निदेशालय और शासन स्तर के पत्रों के बावजूद पीपीगंज के तत्कालीन अध्यक्ष गंगा प्रसाद जायसवाल और उसके बाद आए कई अधिशासी अधिकारियों (EO) ने इस मामले में पूरी तरह चुप्पी साधे रखी। वर्तमान में अधिकारियों द्वारा यह अजीबोगरीब और गैर-जिम्मेदाराना तर्क दिया जा रहा है कि, “यह भुगतान तत्कालीन अधिकारी के समय क्यों नहीं हुआ? अब हम इसे कैसे कर सकते हैं?”
अधिकारियों का यह रवैया प्रशासनिक नियमों के पूरी तरह खिलाफ है, क्योंकि सरकारी विभागों में अधिकारी बदलते रहते हैं लेकिन शासन द्वारा स्वीकृत वैध वित्तीय दायित्व कभी खत्म नहीं होते।
उठते हैं गंभीर सवाल:
वर्ष 2026 आ चुका है, लेकिन एक प्रामाणिक मीडिया संस्थान का वैध ₹55,000 का भुगतान दबाकर बैठना स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है:
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- जब नगर विकास विभाग के विशेष सचिव और नगरीय निकाय निदेशालय दोनों का स्पष्ट और लिखित आदेश मौजूद है, तो पीपीगंज नगर पंचायत इसे दबाने की जुर्रत कैसे कर रहा है?
- क्या उत्तर प्रदेश शासन और लखनऊ निदेशालय से जारी होने वाले आदेशों की स्थानीय अधिकारियों की नज़र में कोई कानूनी अहमियत नहीं है?
- पुराने कार्यकाल का बहाना बनाकर भुगतान रोकना किस प्रशासनिक नियमावली के तहत आता है?
24 टुडे न्यूज़ अब इस पूरे मामले को पुख्ता दस्तावेजी सबूतों के साथ सीधे माननीय मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल और नगर विकास मंत्री के समक्ष ले जाने की तैयारी में है, ताकि शासन के आदेशों का मखौल उड़ाने वाले इन ज़िम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जा सके।








