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2 साल से खुला नाला दे रहा है मौत को दावत, नगर निगम गहरी नींद में

लखनऊ , 22 अक्टूबर: राजधानी के मुंशीपुलिया के निकट डी-ब्लाॅक (बीएसएनएल एक्सचेंज के पास) स्थित रिहायशी इलाके के नागरिक पिछले 2 साल से प्रशासनिक और निर्माण एजेंसियों की गंभीर लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे हैं। कॉलोनी के मुख्य गेट पर स्थित एक बड़ा नाला महीनों से खुला पड़ा है, जो अब राहगीरों और स्थानीय निवासियों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। जल निकासी के नियमों को ताक पर रखकर किए गए निर्माण के कारण कॉलोनी का सीवर सिस्टम पूरी तरह ठप हो चुका है।
यह बेहद निराशाजनक और चिंताजनक है कि मीडिया में आवाज उठाने और लगातार शिकायतें करने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं। जब सरकारी मशीनरी इस कदर बेअसर हो जाए, तो इस मुद्दे को और बड़े स्तर पर उठाना जरूरी हो जाता है।
बिना सर्वे के बदला नाले का लेवल, बढ़ी मुसीबत
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, यह समस्या तब और विकराल हो गई जब नगर निगम और हाईवे निर्माण करने वाली अथॉरिटी ने बिना किसी तकनीकी सर्वे के मुख्य सड़क के नाले का निर्माण कराया। नए नाले का स्तर (Level) कॉलोनी के आंतरिक नाले से काफी ऊंचा कर दिया गया। इस तकनीकी खामी के कारण पानी का प्राकृतिक बहाव रुक गया है और गंदा पानी आगे जाने के बजाय वापस कॉलोनी के गेट और लोगों के घरों की तरफ बैक फ्लो कर रहा है।
रोज हो रहे हादसे
कॉलोनी में आने-जाने का यह एकमात्र मुख्य रास्ता है, जहाँ स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और वाहनों की भारी आवाजाही रहती है। आए दिन लोग और गाड़ियां इस खुले नाले में गिरकर चोटिल हो रहे हैं। रात के अंधेरे में यह रास्ता किसी बड़े हादसे को आमंत्रण देता नजर आता है।
बजट का अभाव या इच्छाशक्ति की कमी?
सरकारी तंत्र इस गंभीर समस्या पर बेरुखी अपनाए हुए है। संबंधित विभाग के कर्मचारी शिकायतों के बाद भी सुध लेने नहीं आते।
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- अधिकारियों का पक्ष: विभागीय अधिकारियों का तर्क है कि बजट के घोर अभाव के कारण वे स्थाई कार्य कराने में असमर्थ हैं। अधिकारियों के अनुसार, यदि इस पुरानी सीवर लाइन को इंदिरा नगर सेक्टर-15 की सीवर लाइन से जोड़ दिया जाए, तो समस्या का समाधान हो सकता है, लेकिन कुछ स्थानीय गतिरोधों के कारण यह कार्य अटका हुआ है।
- राजनीतिक प्रयास: इस बीच, नेता हिमांशु भट्ट लगातार अधिकारियों के संपर्क में हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सीवर ओवरफ्लो होने पर हिमांशु भट्ट के व्यक्तिगत हस्तक्षेप और प्रयासों के बाद ही अधिकारियों द्वारा मौके पर कुछ तात्कालिक राहत कार्य कराया जाता है।
संक्रामक बीमारियों का खतरा, आंदोलन की चेतावनी
खुले नाले के कारण इलाके में डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा चरम पर है। आक्रोशित निवासियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में सीधे हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। जनता का कहना है कि यदि जल्द ही क्षतिग्रस्त नाले की मरम्मत और नई सीवर लाइन का कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होंगे।










