तेहरान। ईरान-अमरीका युद्ध के तीसरे सप्ताह में प्रवेश करने के साथ ही पश्चिम एशिया में तनाव तेजी से और बढ़ रहा है। अमरीका के सबसे उन्नत विमानवाहक पोत यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड को क्षेत्र में तैनात किया गया है, जिसके जवाब में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्र्स (आईआरजीसी) ने अमरीका को कड़ी चेतावनी जारी की है। आईआरजीसी के प्रवक्ता अली मोहम्मद नैनी ने एक बयान में कहा कि अब तक युद्ध में इस्तेमाल की गई मिसाइलें कम से कम 10 साल पुरानी हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले साल जून में अमरीका-इजरायल संघर्ष के बाद विकसित नए हथियारों का जखीरा अभी तक तैनात नहीं किया गया है। नैनी ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के पूर्ण नियंत्रण की बात दोहराते हुए कहा कि अगर दुश्मन हमारी नौसेना को नष्ट करने का दावा करता है, तो वे अपने युद्धपोतों को फारस की खाड़ी में लाने की हिम्मत करें। दरअसल, अमरीकी राष्ट्रपति कई बार कह चुके हैं कि ईरान की सेना को तबाह कर दिया है। नौसेना अब किसी काम की नहीं है।
ऐसे में नैनी का नया बयान राष्ट्रपति ट्रंप को जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। साथ ही इसे ओपन चैलेंज भी बताया जा रहा है। बता दें कि ईरान युद्ध शुरू होने के साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों का आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जो विश्व के लगभग एक-पांचवें हिस्से के कच्चे तेल परिवहन का प्रमुख मार्ग है। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संकट को दूर करने के लिए सात देशों से संपर्क किया और उन्हें जलडमरूमध्य में युद्धपोत भेजने का आग्रह किया, लेकिन जापान और ऑस्ट्रेलिया ने इसमें भाग लेने से इनकार कर दिया है। जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने सोमवार को कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच जापान ने जहाजों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए नौसैनिक पोत भेजने का कोई निर्णय नहीं लिया है। सुश्री ताकाइची ने संसद में कहा कि सरकार अभी भी इस बात की जांच कर रही है कि जापान की कानूनी संरचना के अंदर क्या-क्या कदम उठाए जा सकते हैं और वह स्वतंत्र रूप से क्या कार्रवाई कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा जहाज भेजने के संबंध में अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है।