
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को एक पत्र लिखा। उन्होंने हाल ही में दिल्ली में पेपर लीक को लेकर हुए छात्र आंदोलन और 21 जुलाई को संसद तक निकाले गए मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर निचले सदन में चर्चा के लिए समय तय करने की मांग की। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है, जब शाह ने संसद में जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए विपक्ष को चर्चा के लिए 24 घंटे की समयसीमा का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने कहा था कि वे विपक्ष द्वारा उठाए गए सभी सवालों का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। गृह मंत्री ने बताया कि वह इस चर्चा में हिस्सा लेने के लिए गुरुवार दोपहर तीन बजे तक सदन में मौजूद रहेंगे। मैं खुद चर्चा में बैठूंगा। अब विपक्ष को तय करना है कि उन्हें चर्चा करनी है या हंगामा करना है। अब जनता तय करे कौन भाग रहा है। इस पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि वह पिछले 20 दिनों से सदन से गायब हैं और उनमें संसद में आकर छात्रों पर पुलिस कार्रवाई से जुड़े सवालों का जवाब देने की हिम्मत नहीं है।
राहुल गांधी ने बुधवार को संसद भवन परिसर में कहा कि विपक्ष को अमित शाह का भाषण नहीं, बल्कि छात्रों पर हुई कार्रवाई के सवालों के जवाब चाहिए। उन्हें संसद में आने की हिम्मत दिखानी चाहिए, लेकिन ऐसा लगता है कि गृहमंत्री को अपनी छवि की ज्यादा चिंता है, इसलिए वह सदन में आने से बच रहे हैं। उन्होंने कहा कि सच यही है कि अमित शाह की इमेज का गुब्बारा फट चुका है। उनके अंदर संसद आने की हिम्मत ही नहीं है। वे 20 दिनों से गायब हैं। यहां बैठे थे, गाड़ी आती थी, जाती थी। उनके काफिले में करीब 30 गाडिय़ां चलती हैं और उनके घर के सामने हजारों पुलिस वाले खड़े रहते हैं, इस डर से कि कहीं कोई बच्चा न आ जाए। अब जबरन उस गुब्बारे में फिर से हवा भरने की कोशिश की जा रही है, लेकिन गुब्बारा फट चुका है। श्री शाह में कोई साहस नहीं बचा है। देश के गृह मंत्री सदन में नहीं आ सकते। श्री शाह के यह कहने से कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है, विपक्ष की मांग नहीं बदलती।








