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पाकिस्तान के हवाई हमलों में 23 लोगों की मौत, अफगानिस्तान बोला- सही समय पर देंगे जवाब

अफ़गानिस्तान। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने रविवार को चेतावनी दी है कि पाकिस्तान के आक्रामकता वाले कृत्य का सही समय पर नपा-तुला और उचित जवाब दिया जाएगा। पाकिस्तान के इस हमले में बीस से अधिक अफगानी नागरिक मारे गए हैं। इससे पहले आज सुबह अफगान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा था कि पाकिस्तान वायु सेना के रात भर किये गये हवाई हमलों में पक्तिका और नंगरहार के सीमावर्ती प्रांतों में महिलाओं और बच्चों सहित 23 नागरिक मारे गये हैं।

मंत्रालय के जारी बयान में कहा गया है कि पाकिस्तानी सैन्य शासन ने एक बार फिर नंगरहार और पक्तिका प्रांतों में मदरसों और आवासीय भवनों सहित कई नागरिक ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। इन हमलों के परिणामस्वरूप, महिलाओं और बच्चों सहित दर्जनों निर्दोष नागरिक हताहत हुए हैं। रक्षा मंत्रालय ने अफगानिस्तान की संप्रभुता के इस खुले उल्लंघन की निंदा करते हुए इसे आपराधिक कृत्य बताया है। मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून, अच्छे पड़ोसी के सिद्धांतों और इस्लामी मूल्यों का घोर उल्लंघन करार दिया है।

बयान में कहा गया है कि रक्षा मंत्रालय देश की सीमाओं की रक्षा करना और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अपना धार्मिक और राष्ट्रीय कर्तव्य मानता है। मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि इस कृत्य का आवश्यक और विचारपूर्ण जवाब उचित समय पर दिया जाएगा। अफगान सैन्य कमान नागरिक सुविधाओं और धार्मिक केंद्रों पर किये गये इन हमलों को पाकिस्तानी सेना की ‘खुफिया एवं सुरक्षा विफलताओं’ के प्रमाण के रूप में देखती है। मंत्रालय ने कहा कि इस तरह के बार-बार होने वाले उल्लंघन उनकी आंतरिक विफलताओं को छिपाने में कभी सक्षम नहीं होंगे।

शनिवार को पाकिस्तान के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने कहा था कि उसके बलों ने अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा क्षेत्र में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और उससे संबद्ध विलाया खुरासान के सात शिविरों और ठिकानों पर हमला किया है। ये दोनों इस्लामिक स्टेट की शाखा हैं और रूस में आतंकवादी संगठन के रूप में प्रतिबंधित हैं। पिछले साल अक्टूबर से अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा वाले इलाकों में बार-बार झड़पें हुई हैं। पिछले साल 19 अक्टूबर को, कतर और तुर्की की मध्यस्थता में दोनों पक्ष संघर्षविराम पर सहमत हुए थे। इसके बाद सीजफायर को बनाये रखने के लिए दोहा, इस्तांबुल और रियाद में कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।

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