
देश के प्रधानमंत्री का एक भाषण… और उसके बाद देशभर में चर्चाओं का तूफान तेज हो गया। सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक हर जगह सिर्फ एक ही सवाल— आखिर पीएम मोदी ने जनता से ये 7 अपीलें क्यों कीं? बीते रोज पीएम के भाषण में न कोई बड़ा वादा था, न कोई चुनावी घोषणा, बल्कि था आने वाले समय के लिए एक बड़ा संकेत।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से 7 खास अपीलें कीं— अगर आप अभी तक उन अपीलों के बारे में नहीं जान पाए हैं तो चलिए हम बताते हैं-
पहला वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने की बात, पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने की सलाह, सार्वजनिक परिवहन और मेट्रो सेवाओं का ज्यादा इस्तेमाल, खाने के तेल में कटौती, प्राकृतिक खेती को अपनाने, स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा देने और अनावश्यक विदेश यात्रा व सोने की खरीद पर रोक लगाने की अपील।
बस… इन्हीं 7 अपीलों ने पूरे देश में नई बहस छेड़ दी। क्या भारत आने वाले आर्थिक दबाव की तैयारी कर रहा है? क्या महंगाई बढ़ने वाली है? क्या दुनिया में चल रही उथल- पुथल का असर अब सीधे भारतीय घरों तक पहुंच सकता है?

ऐसे में भारत की सबसे बड़ी चिंता ऊर्जा और आयात से जुड़ी हुई है। देश अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से मंगाता है। इनमें भी बड़ी मात्रा में सप्लाई होर्मुज़ स्ट्रेट के रास्ते आती है। अगर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है और तेल सप्लाई प्रभावित होती है, तो पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं। इससे महंगाई बढ़ेगी, परिवहन महंगा होगा और आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।
यही वजह है कि सरकार अभी से ईंधन बचाने और सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल पर जोर दे रही है। फिलहाल देश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है, लेकिन सरकार भविष्य के खतरे को देखते हुए पहले से तैयारी करना चाहती है ताकि अचानक किसी बड़े संकट की स्थिति पैदा न हो।
सिर्फ तेल ही नहीं… खाने का तेल, उर्वरक और यहा तक कि भारत अपनी प्राकृतिक गैस की जरूरत का लगभग 50% एलएनजी (LNG) आयात के माध्यम से पूरा करता है, यानि कि जरूरत की बहुत सी चीजों पर भारत काफी हद तक आयात पर निर्भर है। दूसरी ओर यूरिया, डीएपी, पोटाश और इनके कच्चे माल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार और कच्चे तेल से जुड़ी होती हैं। ऐसे में अगर वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होती है तो खेती की लागत बढ़ सकती है और इसका असर सीधे खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर दिखाई देगा। दूसरी ओर इलेक्ट्रॉनिक आइटम और विमान यात्रा भी महंगी हो सकती है, इसीलिए समय रहते इन चीजों पर भी कंट्रोल की कोशिश हो रही है।
वहीं सबसे ज्यादा चर्चा प्रधानमंत्री की उस अपील को लेकर हुई जिसमें लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने की बात कही गई। भारत हर साल करीब 800 से 900 टन सोना आयात करता है। ऐसे में जब देश बड़ी मात्रा में तेल और सोना दोनों विदेशों से खरीदेगा, तो डॉलर की मांग बढ़ेगी। इससे रुपया कमजोर हो सकता है और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। इसीलिए फिलहाल चाहे सोना हो पेट्रोल हो या कोई और चीज जो हमे विदेश से खरीदनी पड़ रही है उसमे हमें सावधानी से इस्तेमाल की सलाह दी गई है. ताकि फिजूल खर्ची न हो, ऐसे में ये कहा जा सकता है कि सरकार की कोशिश साफ दिखाई दे रही है—विदेशी संसाधनों पर निर्भरता कम करना, डॉलर की बचत करना, और देश को हर वैश्विक संकट के लिए पहले से तैयार रखना। स्वदेशी पर जोर भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। ताकि अगर अंतरराष्ट्रीय हालात और बिगड़ें, तो भारत अपनी जरूरतों के लिए ज्यादा से ज्यादा अपने संसाधनों पर निर्भर रह सके।कुल मिलाकर देखा जाए तो पीएम मोदी की ये 7 अपीलें सिर्फ सलाह नहीं, बल्कि आने वाले समय को लेकर एक चेतावनी और तैयारी दोनों का संदेश मानी जा रही हैं।







