
नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनशन गुरूवार को 19 वें दिन में प्रवेश कर गया और उनका वजन इस दौरान करीब नौ किलोग्राम से अधिक घट गया है। चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनका अनशन जारी रहा तो जल्द ही शरीर के अंगों पर असर पड़ने वाला गंभीर चरण शुरू हो सकता है। वांगचुक विभिन्न परीक्षाओं में पेपर लीक के खिलाफ तथा शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बैनर तले अनिश्चतकालीन अनशन पर हैं। वह शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं।
सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की निगरानी कर रहे डॉ. सतीश लाम्बा ने कहा है कि फिलहाल वह मानसिक रूप से पूरी तरह सतर्क हैं और उनकी स्थिति स्थिर है, लेकिन उनकी हालत कभी भी गंभीर हो सकती है।उनका वजन करीब नौ किलो घटकर 56.9 किलोग्राम रह गया है। उन्होंने कहा कि शरीर में पानी की मात्रा फिलहाल संतोषजनक है। डॉ. लाम्बा के अनुसार अनशन के दूसरे चरण में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ गया है, जो मांसपेशियों के टूटने और शरीर द्वारा उनके उपयोग का संकेत है।
उन्होंने कहा कि अब तीसरा चरण शुरू होने की आशंका है, जिसमें शरीर के आंतरिक अंग प्रभावित हो सकते हैं। इस बीच राजनेताओं, समर्थकों और कानूनी स्तर पर अनशन समाप्त करने की अपीलों के बावजूद श्री वांगचुक ने इसे समाप्त करने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि सरकार की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया मिले बिना अनशन तोड़ने से गलत संदेश जाएगा।
उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा, “अगर मैं खाना खा लूं तो सरकार को यह संदेश जाएगा कि जवाबदेही की कोई जरूरत नहीं है। लोग विरोध करते हैं और फिर चले जाते हैं। मुझे अनशन समाप्त करने की हजारों अपीलें मिली हैं और कई वरिष्ठ नेताओं ने भी व्यक्तिगत रूप से आग्रह किया है।” उन्होंने समर्थकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि अब तक कराई गई चिकित्सकीय जांच में कोई तत्काल खतरे की स्थिति सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा कि “मेरी हालत ऐसी नहीं है कि दो-चार दिन में मेरी मृत्यु हो जाएगी। कई चिकित्सकीय जांचों के नतीजे 18 दिन के उपवास के हिसाब से सामान्य हैं। ईसीजी भी कराया गया है और उसकी रिपोर्ट संतोषजनक है। मैं अभी कई दिन और अनशन जारी रख सकता हूं।”
वांगचुक ने स्वीकार किया कि उन्हें कमजोरी महसूस हो रही है और मांसपेशियों का क्षय हुआ है, लेकिन उनका हृदय और अन्य महत्वपूर्ण शारीरिक क्रियाएं अभी सामान्य हैं। उन्होंने समर्थकों से उनके अनशन पर अधिक ध्यान देने के बजाय 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन प्रस्तावित ‘चलो संसद’ मार्च को सफल बनाने की अपील की है।








