
नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी समूहों ने अपने ट्रेनिंग कैंपों का रूप और तरीका काफी हद तक बदल दिया है। एक वरिष्ठ खुफिया अधिकारी ने बुधवार को बताया कि अब ये समूह आतंकी ढांचे को उन इमारतों में छिपा रहे हैं, जिनका इस्तेमाल आम लोग रहने, पढऩे या रोजमर्रा के कामों के लिए भी करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यह बदलाव सिर्फ शिविरों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने तक सीमित नहीं है। असली बदलाव यह है कि इन जगहों को अब कैसे बनाया, इस्तेमाल और छिपाया जा रहा है। पहले आतंकी ट्रेनिंग कैंप के तौर पर इस्तेमाल होने वाली इमारत या जगह आमतौर पर पूरी तरह उसी काम के लिए होती थी। पूरा परिसर आतंकी गतिविधियों के लिए समर्पित दिखता था।
हालांकि ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह पैटर्न बदल गया है। अब आतंकी गतिविधियां एक या दो मंजिल तक सीमित रखी जा सकती हैं। बाकी मंजिलों पर लोग रह सकते हैं या स्कूल-कॉलेज जैसी पढ़ाई-लिखाई चल सकती है। इससे पूरी इमारत बाहर से सामान्य नागरिक जगह जैसी लगती है। अधिकारियों का आकलन है कि पाकिस्तान में मौजूद आतंकी समूह अपने ठिकानों के चारों ओर आम लोगों की एक ढाल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि ऐसी जगह पर हमला करने में नागरिक हताहत होने का खतरा बढ़ जाएगा। साथ ही पाकिस्तान को यह कहने का मौका मिल जाएगा कि भविष्य में किसी भारतीय कार्रवाई में आम लोगों को निशाना बनाया गया।








