बड़ी लापरवाही: पिछले कई महीनों से कॉलोनी गेट का बजबजाता नाला बना जानलेवा दुर्घटनाओं का सबब, शासन की छवि को लग रहा बट्टा

कॉलोनी गेट के ठीक सामने खुला नाला बना जानलेवा दुर्घटनाओं का सबब

चूंकि यह नाला कॉलोनी के मुख्य गेट पर ही खुला पड़ा है, इसलिए यहाँ से गुजरने वाले स्थानीय निवासियों, राहगीरों, स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को चौबीसों घंटे भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कॉलोनी में आने-जाने का एकमात्र मुख्य रास्ता होने के कारण यहाँ हर वक्त वाहनों और पैदल लोगों की भारी आवाजाही रहती है, लेकिन उचित बैरिकेडिंग या ढक्कन न होने के कारण आए दिन लोग और गाड़ियां कॉलोनी गेट पर ही इस खुले नाले में गिरकर चोटिल हो रहे हैं। रात के अंधेरे में गेट के पास का यह रास्ता किसी मौत के कुएं जैसा नजर आता है, जिससे कभी भी कोई बड़ा और जानलेवा हादसा हो सकता है।
स्थानीय जनता में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार प्रदेश में विकास, बेहतर बुनियादी ढांचे और त्वरित जनसुनवाई के लिए जानी जाती है, वहीं दूसरी तरफ मुंशीपुलिया में अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं की यह घोर लापरवाही योगी सरकार के सुशासन और ‘जीरो टॉलरेंस’ की छवि को सीधे तौर पर क्षति पहुंचा रही है। अधिकारियों का यह ढुलमुल रवैया शासन की साख पर बट्टा लगाने का काम कर रहा है।
जल निकासी के मूलभूत नियमों को ताक पर रखकर किए गए इस निर्माण के कारण कॉलोनी के पानी का प्राकृतिक बहाव पूरी तरह रुक गया है। मुख्य नाले का स्तर ऊंचा होने की वजह से पानी आगे जाने के बजाय वापस कॉलोनी के गेट और लोगों के घरों की तरफ बैक फ्लो हो रहा है।
इस तकनीकी खामी का सबसे बुरा असर स्थानीय निवासियों के सीवर सिस्टम पर पड़ा है। क्षेत्र के घरों का सीवर आए दिन चोक और ओवरफ्लो रहता है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि घरों के सीवर चोक या ओवरफ्लो होने पर संबंधित विभाग और सुएज इंडिया के कर्मचारी एक बार शिकायत करने पर सुध लेने तक नहीं आते। कई-कई दिनों तक चक्कर काटने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती है।
बजट के अभाव में खुद को असमर्थ बता रहा सरकारी तंत्र
सरकारी तंत्र की इस बेरुखी के बीच भाजपा नेता हिमांशु भट्ट लगातार अधिकारियों से संपर्क साधकर और उनसे वार्तालाप कर समस्याओं का समाधान कराने में जुटे हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार जब भी क्षेत्र में सीवर चोक या ओवरफ्लो की समस्या होती है, तो हिमांशु भट्ट तुरंत अधिकारियों से बात कर मौके पर कार्य करवाते हैं। हालांकि, विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बजट का घोर अभाव होने के कारण वे स्थाई कार्य करने में पूरी तरह असमर्थ हैं। अधिकारियों के अनुसार, यदि इस पुरानी सीवर लाइन को सेक्टर 15 इंदिरा नगर की सीवर लाइन से जोड़ दिया जाए, तो समस्या काफी हद तक हल हो सकती है, लेकिन कुछ लोग इस कार्य को होने नहीं दे रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि हिमांशु भट्ट के व्यक्तिगत सहयोग के कारण ही उन्हें इस नर्क में थोड़ी राहत मिल पाती है।
संक्रामक बीमारियों का खतरा, बड़े आंदोलन की तैयारी
स्थिति तब भयावह हो जाती है जब थोड़ी सी भी बरसात होने पर नाले और सीवर का घिनौना, बदबूदार और दूषित पानी बैकफ्लो होकर लोगों में भर जाता है। क्षेत्रीय जनता पिछले 2 साल से गंदे पानी और बहते हुए सीवर के बीच रहने को मजबूर है। गेट पर खुले और बजबजाते नाले के कारण इलाके में मच्छरों का प्रकोप चरम पर है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा हर वक्त सिर पर मंडराता रहता है।









