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बड़ी लापरवाही: पिछले कई महीनों से कॉलोनी गेट का बजबजाता नाला बना जानलेवा दुर्घटनाओं का सबब, शासन की छवि को लग रहा बट्टा

कॉलोनी गेट के ठीक सामने खुला नाला बना जानलेवा दुर्घटनाओं का सबब; स्थानीय नेता हिमांशु भट्ट के प्रयासों के बावजूद लापरवाह प्रशासन नहीं ले रहा सुध
लखनऊ (मुंशीपुलिया)। राजधानी के मुंशीपुलिया D-Block (BSNL एक्सचेंज के बगल में) स्थित रिहायशी इलाका पिछले एक साल से प्रशासनिक और निर्माण एजेंसियों की गंभीर लापरवाही का खामियाजा भुगत रहा है। कॉलोनी के मुख्य गेट पर ही स्थित यह बड़ा नाला पिछले कई दिनों से पूरी तरह खुला पड़ा है और पिछले कई महीनों से कचरे व गंदे पानी से बजबजा रहा है। समस्या तब और विकराल हो गई जब सुएज इंडिया (Suez India) और हाईवे निर्माण करने वाली अथॉरिटी ने बिना किसी तकनीकी सर्वे के मुख्य सड़क के नाले का निर्माण कॉलोनी के आंतरिक नाले के स्तर (Level) से काफी ऊंचा कर दिया।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, मुख्य गेट पर रोजाना गिर रहे राहगीर, जान का खतरा
चूंकि यह नाला कॉलोनी के मुख्य गेट पर ही खुला पड़ा है, इसलिए यहाँ से गुजरने वाले स्थानीय निवासियों, राहगीरों, स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को चौबीसों घंटे भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कॉलोनी में आने-जाने का एकमात्र मुख्य रास्ता होने के कारण यहाँ हर वक्त वाहनों और पैदल लोगों की भारी आवाजाही रहती है, लेकिन उचित बैरिकेडिंग या ढक्कन न होने के कारण आए दिन लोग और गाड़ियां कॉलोनी गेट पर ही इस खुले नाले में गिरकर चोटिल हो रहे हैं। रात के अंधेरे में गेट के पास का यह रास्ता किसी मौत के कुएं जैसा नजर आता है, जिससे कभी भी कोई बड़ा और जानलेवा हादसा हो सकता है।
चूंकि यह नाला कॉलोनी के मुख्य गेट पर ही खुला पड़ा है, इसलिए यहाँ से गुजरने वाले स्थानीय निवासियों, राहगीरों, स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को चौबीसों घंटे भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कॉलोनी में आने-जाने का एकमात्र मुख्य रास्ता होने के कारण यहाँ हर वक्त वाहनों और पैदल लोगों की भारी आवाजाही रहती है, लेकिन उचित बैरिकेडिंग या ढक्कन न होने के कारण आए दिन लोग और गाड़ियां कॉलोनी गेट पर ही इस खुले नाले में गिरकर चोटिल हो रहे हैं। रात के अंधेरे में गेट के पास का यह रास्ता किसी मौत के कुएं जैसा नजर आता है, जिससे कभी भी कोई बड़ा और जानलेवा हादसा हो सकता है।
सीएम योगी के राज में ऐसी लापरवाही से शासन की छवि को लग रहा बट्टा
स्थानीय जनता में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार प्रदेश में विकास, बेहतर बुनियादी ढांचे और त्वरित जनसुनवाई के लिए जानी जाती है, वहीं दूसरी तरफ मुंशीपुलिया में अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं की यह घोर लापरवाही योगी सरकार के सुशासन और ‘जीरो टॉलरेंस’ की छवि को सीधे तौर पर क्षति पहुंचा रही है। अधिकारियों का यह ढुलमुल रवैया शासन की साख पर बट्टा लगाने का काम कर रहा है।
स्थानीय जनता में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार प्रदेश में विकास, बेहतर बुनियादी ढांचे और त्वरित जनसुनवाई के लिए जानी जाती है, वहीं दूसरी तरफ मुंशीपुलिया में अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं की यह घोर लापरवाही योगी सरकार के सुशासन और ‘जीरो टॉलरेंस’ की छवि को सीधे तौर पर क्षति पहुंचा रही है। अधिकारियों का यह ढुलमुल रवैया शासन की साख पर बट्टा लगाने का काम कर रहा है।
इंजीनियरिंग की बड़ी चूक, भुगत रहे स्थानीय निवासी
जल निकासी के मूलभूत नियमों को ताक पर रखकर किए गए इस निर्माण के कारण कॉलोनी के पानी का प्राकृतिक बहाव पूरी तरह रुक गया है। मुख्य नाले का स्तर ऊंचा होने की वजह से पानी आगे जाने के बजाय वापस कॉलोनी के गेट और लोगों के घरों की तरफ बैक फ्लो हो रहा है।
जल निकासी के मूलभूत नियमों को ताक पर रखकर किए गए इस निर्माण के कारण कॉलोनी के पानी का प्राकृतिक बहाव पूरी तरह रुक गया है। मुख्य नाले का स्तर ऊंचा होने की वजह से पानी आगे जाने के बजाय वापस कॉलोनी के गेट और लोगों के घरों की तरफ बैक फ्लो हो रहा है।
घरों में भरा सीवर, एक शिकायत पर नहीं आती सरकारी मशीनरी
इस तकनीकी खामी का सबसे बुरा असर स्थानीय निवासियों के सीवर सिस्टम पर पड़ा है। क्षेत्र के घरों का सीवर आए दिन चोक और ओवरफ्लो रहता है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि घरों के सीवर चोक या ओवरफ्लो होने पर संबंधित विभाग और सुएज इंडिया के कर्मचारी एक बार शिकायत करने पर सुध लेने तक नहीं आते। कई-कई दिनों तक चक्कर काटने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती है।
इस तकनीकी खामी का सबसे बुरा असर स्थानीय निवासियों के सीवर सिस्टम पर पड़ा है। क्षेत्र के घरों का सीवर आए दिन चोक और ओवरफ्लो रहता है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि घरों के सीवर चोक या ओवरफ्लो होने पर संबंधित विभाग और सुएज इंडिया के कर्मचारी एक बार शिकायत करने पर सुध लेने तक नहीं आते। कई-कई दिनों तक चक्कर काटने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होती है।
संकटमोचक बने स्थानीय नेता हिमांशु भट्ट, लगातार कर रहे मदद
सरकारी तंत्र की इस घोर संवेदनहीनता के बीच स्थानीय नेता हिमांशु भट्ट क्षेत्र की जनता के लिए संकटमोचक बने हुए हैं। इस गंभीर समस्या को लेकर हिमांशु भट्ट द्वारा शासन-प्रशासन के स्तर पर अब तक कई बड़े प्रयास और पत्राचार किए जा चुके हैं। इतना ही नहीं, जब भी किसी D-Block निवासी के घर का सीवर चोक या ओवरफ्लो होता है और सरकारी महकमा आंखें मूंद लेता है, तब हिमांशु भट्ट खुद खड़े होकर और अपने स्तर पर संसाधनों की व्यवस्था कर स्थानीय लोगों की मदद करते हैं और सीवर को दुरुस्त करवाते हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि हिमांशु भट्ट के व्यक्तिगत सहयोग के कारण ही उन्हें इस नरक में थोड़ी राहत मिल पाती है।
सरकारी तंत्र की इस घोर संवेदनहीनता के बीच स्थानीय नेता हिमांशु भट्ट क्षेत्र की जनता के लिए संकटमोचक बने हुए हैं। इस गंभीर समस्या को लेकर हिमांशु भट्ट द्वारा शासन-प्रशासन के स्तर पर अब तक कई बड़े प्रयास और पत्राचार किए जा चुके हैं। इतना ही नहीं, जब भी किसी D-Block निवासी के घर का सीवर चोक या ओवरफ्लो होता है और सरकारी महकमा आंखें मूंद लेता है, तब हिमांशु भट्ट खुद खड़े होकर और अपने स्तर पर संसाधनों की व्यवस्था कर स्थानीय लोगों की मदद करते हैं और सीवर को दुरुस्त करवाते हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि हिमांशु भट्ट के व्यक्तिगत सहयोग के कारण ही उन्हें इस नरक में थोड़ी राहत मिल पाती है।
संक्रामक बीमारियों का खतरा, बड़े आंदोलन की तैयारी
स्थिति तब भयावह हो जाती है जब थोड़ी सी भी बरसात होने पर नाले और सीवर का घिनौना, बदबूदार और दूषित पानी बैकफ्लो होकर लोगों में भर जाता है। गेट पर खुले और बजबजाते नाले के कारण इलाके में मच्छरों का प्रकोप चरम पर है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा हर वक्त सिर पर मंडराता रहता है। स्थानीय जनता का कहना है कि अगर हाईवे अथॉरिटी, सुएज इंडिया और नगर निगम ने हिमांशु भट्ट की मांगों पर जल्द से जल्द संज्ञान लेकर नाले का लेवल ठीक नहीं किया और गेट के इस रास्ते को सुरक्षित नहीं बनाया, तो क्षेत्र के लोग सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
स्थिति तब भयावह हो जाती है जब थोड़ी सी भी बरसात होने पर नाले और सीवर का घिनौना, बदबूदार और दूषित पानी बैकफ्लो होकर लोगों में भर जाता है। गेट पर खुले और बजबजाते नाले के कारण इलाके में मच्छरों का प्रकोप चरम पर है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा हर वक्त सिर पर मंडराता रहता है। स्थानीय जनता का कहना है कि अगर हाईवे अथॉरिटी, सुएज इंडिया और नगर निगम ने हिमांशु भट्ट की मांगों पर जल्द से जल्द संज्ञान लेकर नाले का लेवल ठीक नहीं किया और गेट के इस रास्ते को सुरक्षित नहीं बनाया, तो क्षेत्र के लोग सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होंगे।











