
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल मामलों की सुनवाई के संबंध में नया नियम जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम आदेश जारी करते हुए कहा है कि ऐसे मामले जो बेहद ही जरूरी हैं, जिन्हें सामान्य लिस्टिंग प्रक्रिया का इंतजार नहीं कराया जा सकता, सिर्फ उन्हें ही चीफ जस्टिस के सामने पेश किया जाएगा। भले ही वह संविधान बेंच की अध्यक्षता कर रहे हों। प्रचलित व्यवस्था के तहत अगर चीफ जस्टिस उपलब्ध नहीं होते या संविधान बेंच की सुनवाई में व्यस्त होते हैं, तो ऐसे जरूरी मामलों को वरिष्ठतम जज के सामने लिस्ट कराने के लिए पेश किया जाता है।
सुप्रीम कोर्ट ने एक परिपत्र जारी करते हुए स्पष्ट किया कि ऐसे जरूरी मामलों की सुनवाई सिर्फ कोर्ट नंबर एक में ही की जाएगी, जहां चीफ जस्टिस बैठते हैं। परिपत्र में यह भी साफ कहा गया है कि इस तरह के मामलों को किसी अन्य बेंच के सामने प्रस्तुत करने की अनुमति नहीं होगी। यह आदेश नवंबर 29 नवंबर, 2025 के परिपत्र का पूरक है, जिसमें सामान्य तत्काल मामलों को स्वत: सूचीबद्ध करने की व्यवस्था की गई थी। इस बदलाव का उद्देश्य अदालती प्रक्रिया को ज़्यादा अनुशासित और केंद्रित बनाना है, जिससे अनावश्यक उल्लेखों को रोका जा सके और न्याय व्यवस्था सुचारू रूप से चले।









