
नई दिल्ली। मिडल ईस्ट में अमरीका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल की आपूर्ति ठप होने से वैश्विक स्तर पर ईंधन का महासंकट खड़ा हो गया है। अमरीका, फ्रांस और ब्रिटेन समेत कई विकसित देश रिकॉर्ड तोड़ ईंधन कीमतों और आपूर्ति की किल्लत से जूझ रहे हैं। कई देशों में डीजल की भारी किल्लत हो गई है। कई पेट्रोल पंप बंद हो गए हैं।
अमरीका में डीजल की राष्ट्रीय औसत कीमत 6.49 डॉलर (करीब 622 रुपए) प्रति गैलन के ऑल-टाइम हाई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। मिडल ईस्ट संकट शुरू होने से ठीक पहले 27 फरवरी को डीजल की कीमत 3.75 डॉलर (करीब 360 रुपए) प्रति गैलन थी। यानी पिछले कुछ महीनों में इसमें 73 फीसदी की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कैलिफोर्निया राज्य में डीजल 8.41 डॉलर (करीब 807 रुपए) प्रति गैलन और पेट्रोल 6.13 डॉलर (करीब 588 रुपए) प्रति गैलन तक पहुंच गया है। अमेरिका का पूरा फ्रेट और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क डीजल पर निर्भर है। ऐसे में खाद्यान्न और माल ढुलाई की लागत आसमान छू रही है।
फ्रांस में ईंधन संकट इतना गहरा गया है कि देश का हर नौवां पेट्रोल पंप (लगभग 11 फीसदी) सूखा पड़ चुका है। कई क्षेत्रों में 16 फीसदी तक स्टेशनों पर ईंधन खत्म हो चुका है। फ्रांस में डीजल की औसत कीमत 2.39 यूरो (करीब 264 रुपए) प्रति लीटर के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गई है। देश के 700 से अधिक पंपों पर प्रीमियम ग्रेड ईंधन 2.50 यूरो (करीब 276 रुपए) से 2.70 यूरो (करीब 298 रुपए) प्रति लीटर तक बिक रहा है। सऊदी द्वारा ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हमले के बाद कम से कम दो बड़े यूरोपीय रिफाइनरों को अक्तूबर की कू्रड सप्लाई बंद करने की सूचना दी गई है, जिससे संकट और गहराया है।
ब्रिटेन में अगस्त महीने में महंगाई दर बढक़र 3.1 फीसदी पर पहुंच गई है, जिसका मुख्य कारण मोटर फ्यूल और एयरफेयर में आई भारी तेजी है। यूके राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (ओएनएस) के अनुसार, पिछले साल अगस्त की तुलना में मोटर फ्यूल की कीमतों में 23 फीसदी का उछाल आया है। जुलाई से अगस्त के बीच पेट्रोल की औसत कीमत 9.1 पेंस बढक़र 161.3 पेंस (करीब 206 रुपए) प्रति लीटर हो गई, जो रूस-यूके्रन युद्ध के शुरुआती समय के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। रूस और मिडिल ईस्ट में रिफाइनरी तथा एक्सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में व्यवधान ने भी डीजल सप्लाई को प्रभावित किया है।







