
नई दिल्ली। नई दिल्ली की स्पेशल एनआईए कोर्ट ने यासीन मलिक समेत सात आरोपियों के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत है, जिससे उन पर मजबूत संदेह होता है। प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि आरोपियों ने पाकिस्तान और अन्य आतंकी संगठनों से हवाला और अलग-अलग माध्यमों से 8.94 करोड़ रुपए लिए। इस रकम को आरोपियों तक पहुंचाई गई। मलिक के अलावा आरोपियों में जहूर अहमद शाह वटाली, अब्दुल राशिद शेख, शबीर अहमद शाह, नवल किशोर कपूर, ट्रिसन फाम्र्स एंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और मसरत आलम भट शामिल हैं।
ईडी ने अपराध से अर्जित रकम की जांच के लिए 14 जून, 2017 को शिकायत दर्ज की थी। कोर्ट ने एनआईए की दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट का जिक्र करते हुए कहा कि यासीन मलिक को सऊदी अरब से 15.75 लाख मिले थे। 30 सितंबर को सुरक्षा कारणों से कुछ आरोपियों को कोर्ट में पेश नहीं किया जा सका। मामले की अगली सुनवाई 30 अक्तूबर को होगी। एनआईए के मुताबिक, यासीन मलिक जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फं्रट का प्रमुख था। संगठन 1990 के दशक से जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों और हिंसा में शामिल रहा है। जहूर अहमद शाह वटाली के यहां से जब्त दस्तावेजों में विदेशी फंडिंग की जानकारी मिली थी।








