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मानवाधिकारों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए – भारत

नई दिल्ली। भारत ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रति दोहरा चरित्र जताने को लेकर सख्त आपत्ति जताई है। बिना पुष्टि के लगाए गए आरोपों और अधूरे आंकड़ों के आधार पर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की नकारात्मक छवि पेश करने के प्रयासों का विरोध करते हुए भारत ने दोटूक कहा है कि मानवाधिकारों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने या चुनिंदा तरीके से देशों को निशाना बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। विदेश मंत्रालय में उप सचिव बरखा ताम्रकर ने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार तंत्रों के साथ मिलकर काम करता है, लेकिन यह सहयोग संवाद, विचार-विमर्श और आपसी सहयोग पर आधारित होना चाहिए। साथ ही, इसमें बिना किसी भेदभाव के सभी देशों के साथ समान व्यवहार और पारदर्शिता के सिद्धांतों का पालन किया जाना चाहिए। ताम्रकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में ‘बलपूर्वक लापता किए गए लोगों से संबंधित कार्य समूह’ से जुड़े एजेंडे पर चर्चा के दौरान भारत का पक्ष रखा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मानवाधिकारों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने या चुनिंदा तरीके से देशों को निशाना बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। ताम्रकर ने कहा कि हम सभी प्रतिनिधिमंडलों से आग्रह करते हैं कि वे रिपोर्ट में कही गई बातों को सही तरीके से प्रस्तुत करें और किसी सूचना में लगाए गए आरोपों को साबित तथ्य के रूप में पेश न करें।

भारत ने कहा कि भारत स्थापित प्रक्रियाओं के माध्यम से उचित दस्तावेजों के साथ सामने लाए गए विशिष्ट मामलों पर स्पष्टीकरण देने के लिए तैयार है। हालांकि, भारतीय राजदूत ने कहा कि भारत अपुष्ट आरोपों, अधूरे आंकड़ों या ऐसी रिपोर्ट के आधार पर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की नकारात्मक छवि पेश करने के किसी भी प्रयास का औपचारिक रूप से विरोध करता है, जिसमें भारत के बारे में कोई टिप्पणी ही नहीं की गई है। बता दें कि ताम्रकर की यह टिप्पणी दिल्ली में हाल में सीजेपी के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों को लेकर संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों द्वारा चिंता जताए जाने के बीच आई है। जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र के 20 से अधिक मानवाधिकार विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय राजधानी में युवाओं के नेतृत्व में हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कथित ‘सख्त कार्रवाई’ पर चिंता जताई थी। विशेषज्ञों ने अधिकारियों से प्रदर्शनों के दौरान मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन के मामलों में न्याय सुनिश्चित करने की भी अपील की थी।

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