
नई दिल्ली। भारतीय सेना ने अपनी ताकत को और बढ़ाते हुए टैंक रेजिमेंट्स को ड्रोन से लैस कर दिया है। अब आर्मर्ड रेजिमेंट्स में शौर्य स्क्वॉड्रन नाम से छह नई यूनिट शामिल कर ली गई हैं। इन स्क्वॉड्रनों में ड्रोन युद्ध की पूरी क्षमता है। पहले सेना ने अपनी पैदल सेना को अश्नी प्लाटून से मजबूत किया था, अब टैंकों को भी ड्रोन का साथ मिल गया है। यह कदम भविष्य के युद्ध के लिए उठाया गया है, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद इसकी गति और तेज हो गई है। शौर्य स्क्वॉड्रन टैंक रेजिमेंट्स के अंदर एक विशेष ड्रोन यूनिट है। इसमें सर्विलांस ड्रोन, अटैक ड्रोन और लॉइटरिंग मुनिशन (घूम-घूमकर हमला करने वाले ड्रोन) शामिल हैं। ये स्क्वॉड्रन टैंकों के साथ मिलकर काम करते हैं।
इनकी मुख्य जिम्मेदारी है दुश्मन की स्थिति की जासूसी करना, सटीक हमला करना, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, इंजीनियरिंग काम जैसे बाधाएं तोडऩा, माइन बिछाना और साफ करना, लॉजिस्टिक्स और मेडिकल सहायता देना। सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद ड्रोन युद्ध पर खास ध्यान दिया। अब पांच से ज्यादा कमांड्स में शौर्य स्क्वॉड्रन खड़े किए जा चुके हैं। उन्हें सीमा पर तैनात किया गया है। हाल ही में साउदर्न कमांड द्वारा बाबिना, उत्तर प्रदेश में आयोजित अमोघ ज्वाला अभ्यास में इन स्क्वॉड्रनों की क्षमता को प्रदर्शित किया गया। इस 13 दिन के बड़े अभ्यास में टैंकों, अटैक हेलिकॉप्टरों, फाइटर एयरक्राफ्ट और ड्रोनों को एक साथ मिलाकर युद्ध का परीक्षण किया गया।
ऐसे बनाएगा मजबूत
टैंक रेजिमेंट्स में ड्रोन जोडऩे से सेना को कई फायदे मिल रहे हैं। अब टैंक सिर्फ फायर पावर नहीं, बल्कि बेहतर खुफिया जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे। ड्रोन दुश्मन की स्थिति, हलचल और हथियारों की जानकारी रीयल टाइम में टैंकों को दे सकेंगे। इससे टैंक यूनिट्स की सटीकता और सुरक्षा दोनों बढ़ जाएगी।









