आपके लेखउत्तर प्रदेशताजा खबरभारत

विश्व स्वास्थ्य दिवस पर विशेष- स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन , जागरूक रहना आवश्यक

विश्व स्वास्थ्य दिवस पर विशेष-

स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन , जागरूक रहना आवश्यक

प्रस्तुति -विवेक कुमार

बीमारियों पर अंकुश लगाने और लोगों को स्वास्थ्य के प्रति सचेत करने के उद्देश्य से हर वर्ष 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। इसको मानना तो जरूरी है ही बल्कि इसके उद्देश्यों को समझ कर अपने जीवन में उतरना उससे भी ज्यादा जरूरी है। ताकि लोगों को स्वास्थ्य का भरपूर लाभ मिल सके। स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है इसे बनाए रखने के लिए जागरूक रहना आवश्यक है विश्व स्वास्थ्य दिवस पर शहर के प्रमुख चिकित्सकों वह समाज के उत्कृष्ट लोगों के विचार जाने, पेश है उन्हीं की जुबानी…..

1. डॉक्टर राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस के प्रोफेसर (डॉक्टर) विकास सिंह बताते हैं कि विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर हम आधुनिक सर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण क्रांति लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लेते हैं। लैप अवेयर पिछले 12 वर्षों से एक सतत सामुदायिक जागरूकता अभियान के रूप में कार्य कर रहा है। जिसका उद्देश्य आम जनता को लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के लाभों के बारे में जागरूक करना एवं इससे जुड़ी भ्रांतियां को दूर करना है। आज के समय में लगभग सभी प्रकार की सर्जरी -जैसे हर्निया, पित्ताशय, अपेंडिक्स, कोलन, स्त्री रोग एवं कई जटिल सर्जरी-लेप्रोस्कोपिक तकनीक द्वारा सुरक्षित एवं प्रभावी रूप से की जा सकती है। यह न केवल मरीज को अत्यधिक सुविधा प्रदान करता है, बल्कि उपचार को अधिक किफायती और सुरक्षित भी बनाता है।

 

2. किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के मानसिक स्वास्थ्य विभाग के अध्यक्ष डॉ विवेक अग्रवाल का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित परेशानियां बहुत ज्यादा बढ़ रही है और इसका बड़ा कारण देखने को मिलता है वह है स्क्रीन का उपयोग। अधिक स्क्रीन उपयोग से आंखों पर जोर, नींद में कमी और शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ सकता है। स्क्रीन का उपयोग बच्चों में बहुत तेजी से बढ़ता जा रहा है और बच्चे कई घंटे उस पर बिता रहे हैं उससे उनके मानसिक स्वास्थ्य उनके जीवन कौशल की क्षमताओं और उनके विकास पर बहुत ज्यादा फर्क पड़ रहा है। इसलिए स्क्रीन का उपयोग बहुत छोटी उम्र से ही कंट्रोल किया जाना चाहिए। यह मानकर मत चलिए की यह कोई शेफ चीज है। आमतौर पर जो रिकमेंडेशन है वह यह है कि 2 साल की उम्र तक के बच्चों को करीब करीब कोई स्क्रीन यूज नहीं होना चाहिए। दो साल से पांच साल के बीच में आधे से एक घंटा, छह से बारह साल की उम्र में एक घंटा। और बारह साल के ऊपर की उम्र के बच्चों को 2 घंटा स्क्रीन यूज करना चाहिए। यह सुपर वाइज ड्यूज होना चाहिए। बच्चों को खास तौर पर इंटरनेट के साथ में ऐसे ही नहीं छोड़ना चाहिए क्योंकि अक्सर वह गलत आदतों का शिकार हो जाते हैं। यह बहुत जरूरी है की माता-पिता को पता होना चाहिए कि उनका बच्चा क्या कर रहा है कहां जा रहा है यह सब मालूम होना चाहिए। इन पर बहुत ध्यान देने की जरूरत है।

 

3. श्री दुर्गा मेडिकल कॉलेज आजमगढ़ की होम्योपैथिक मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर प्रतिभा यादव विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर सभी नागरिकों को संदेश देती हैं कि स्वास्थ्य ही हमारे जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति है। एक स्वस्थ व्यक्ति ही अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय योगदान दे सकता है। आज के समय में बदलती जीवन शैली, असंतुलित आहार, शारीरिक गतिविधियों की कमी तथा बढ़ते मानसिक तनाव के कारण अनेक स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। इसलिए हम सभी को अपने दैनिक जीवन में संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और स्वच्छता को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। साथ ही समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना, टीकाकरण को पूरा करना तथा किसी भी बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। एक चिकित्सा अधिकारी के रूप में आग्रह करती हूं कि अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनें और अपने परिवार तथा समाज को भी स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करें। आइए, इस विश्व स्वास्थ्य दिवस पर हम सब मिलकर “स्वस्थ भारत, सशक्त भारत”के निर्माण का संकल्प लें।

 

4. डॉ अश्वनी कुमार मेहरोत्रा विश्व स्वास्थ्य दिवस पर यह संदेश देते हैं कि हमें चिकित्सकों के रूप में सभी को उनके लोगों को स्वास्थ्य के विषय में हर पहलू में जागरूक करना चाहिए। आजकल देखने में आया है कि गैर संचारी रोग जैसे ब्लड प्रेशर, हृदय रोग अर्थराइटिस, डायबिटीज मोटापा इनका होना यह एक बिगड़ती जीवनशैली से समर्पित है इस विषय पर मैं यही कहूंगा की दवाई के साथ-साथ चिकित्सक अपने मरीज को अच्छी जीवन शैली घर का खाना और थोड़ा सा व्यायाम करने को कहें ताकि उनकी जो सेहत है वह निरोगी रहे औ केर वह एक खुशहाल जिंदगी जी सके।

 

5. सचिवालय के डॉक्टर बृजेश सिंह विश्व स्वास्थ्य दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहते हैं कि स्वास्थ्य ही जीवन का सबसे अनमोल धन है यदि हमारा शरीर और मन स्वस्थ है तो हम हर चुनौती का सामना आसानी से कर सकते हैं। इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर अपने स्वास्थ्य को नजरअंदर कर देते हैं, लेकिन याद रखें कि एक स्वस्थ जीवन ही खुशहाल जीवन की कुंजी है। आइए, विश्व स्वास्थ्य दिवस पर हम संकल्प लें कि हम नियमित व्यायाम करेंगे, संतुलित आहार अपनाएंगे और मानसिक शांति बनाए रखेंगे। स्वस्थ रहें खुश रहें और अपने आसपास के लोगों को भी स्वस्थ रहने के लिए प्रेरित करें।

 

6. रिचमंड फैलोशिप सोसाइटी (इंडिया) की काउंसलर निकिता त्रिपाठी बताती है कि आज की पीढ़ी में स्वस्थ जीवन एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय बन गया है क्योंकि आज की भाग दौड़ भरी जिंदगी में लोग अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देते हैं और अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को पीछे छोड़ देते हैं। अगर हम स्वस्थ नहीं रहेंगे तो बाकी चीजों का भी कोई महत्व नहीं रहता है। अक्सर लोग केवल शारीरिक स्वास्थ्य को ही महत्व देते हैं और मानसिक स्वास्थ्य को उतनी गंभीरता से नहीं लेते हैं जबकि दोनों ही एक दूसरे के बिना अधूरे हैं स्वस्थ मन ही शरीर को मजबूत बनाता है और स्वस्थ शरीर मन को स्थिर रखता है। आज के समय में डायबिटीज, हाई बीपी और माइग्रेन जैसी बीमारियां आम हो गई है साथ ही तनाव, चिंता और घबराहट जैसे समस्या भी बढ़ती जा रही हैं। इन सब का मुख्य कारण हमारी बदलती जीवन शैली, अनियमित दिनचर्या और गलत खानपान है। हमें अपने जीवन में छोटे-छोटे बदलाव लाने चाहिए जैसे समय पर सोना, नियमित व्यायाम करना, संतुलित और पौष्टिक भोजन लेना और बाहर के जंक फूड से दूरी बनाकर रखना और किसी भी तरह की परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए । इस विश्व स्वास्थ्य दिवस पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपनी सेहत को प्राथमिकता देंगे क्योंकि स्वस्थ रहकर ही हम अपने और अपनों का ख्याल रख सकते हैं।

 

7. साइंस की छात्रा प्रतिष्ठा कौर स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देती हैं और दूसरों को भी स्वस्थ रहने की सलाह देती है उनका कहना है कि स्वास्थ्य ही असली हीरो है बिना इसके कोई भी जीत अधूरी है। हर एक घूंट पानी जैसे शरीर को नई ऊर्जा देता है। थोड़ा सा चलना, थोड़ा सा दौड़ना यही है फिट रहने का राज। मुस्कुराना भी एक दवा है जो हर दर्द को हल्का कर देती है। सुबह की ताजी हवा हमें नया जोश देती है। साफ सफाई हमें बीमारियों से दूर रखती है अच्छी नींद शरीर और दिमाग दोनों को आराम देती है। खुश रहना और कम तनाव लेना भी बहुत जरूरी है। छोटी-छोटी अच्छी बातें बहुत बदलाव लाती है। दूसरों का ख्याल रखना भी सेहत का हिस्सा है। विश्व स्वास्थ्य दिवस हमें खुद से प्यार करना सीखाता है। स्वस्थ रहो खुश रहो यही है जिंदगी का असली मंत्र।

 

8. दि रिचमंड फेलोशिप सोसाइटी (इंडिया), लखनऊ शाखा की काउंसलर शीबा कहती हैं कि हर वर्ष विश्व स्वास्थ्य दिवस हमें यह याद दिलाता है की स्वास्थ्य हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण आधार है। यदि हमारा शरीर और मन स्वस्थ है तभी हम अपने जीवन के लक्ष्य को सही ढंग से प्राप्त कर सकते हैं। उनका मानना है कि स्वास्थ्य केवल शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य भी शामिल है। आज की व्यस्त जीवन शैली में लोग तनाव, चिंता और असंतुलित दिनचर्या के कारण कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इसलिए हमें अपने दैनिक जीवन में संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद को शामिल करना चाहिए। मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही आवश्यक है। सकारात्मक सोच, ध्यान (मेडिटेशन) और अपने विचारों को साझा करना हमें मानसिक रूप से मजबूत बनाता है। परिवार और समाज का सहयोग भी अच्छे स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है।

 

9. माउंट कार्मल स्कूल की काउंसलर सुनंदा शुक्ला बताती हैं कि वर्ल्ड हेल्थ डे मनाना इसलिए जरूरी है ताकि हम लोग स्वास्थ्य के प्रति लोगों को जागरुक कर सकें। उनका कहना है कि जैसे व्यक्ति में छोटी व बड़ी बीमारियां होती हैं तो उनका सही से इलाज हो तो उनकी बीमारी ठीक हो जाती है वैसे ही मानसिक रोग भी कोई छोटा या बड़ा होगा लेकिन हर मानसिक रोगी पागल होगा यह जरूरी नहीं है और मानसिक रोगियों के लिए बहुत ही आसान है कि आप उनकी रोजमर्रा की जरूरत के लिए उनकी मदद करें मदद आप कैसे कर सकते हैं जैसे नवोदय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान है वह साइको सोशल रिहैबिलिटेशन पर काम करता है। यानी हम उनके साइकोलॉजिकल पर काम कर रहे हैं जैसे कि सामान उठाना और रखना है अपने कपड़े सही से रखना है पूरा डेली का रूटीन है सुबह उठना, नहाना, और पूजा करना है। अपना काम स्वयं करना छोटे-मोटे जो चीजें हैं यह सारी रिहैबिलिटेशन में आती है। क्योंकि सोशल स्किल्स बढ़ाना और मिलकर काम करना कैसे हम उनकी हेल्प कर सकते हैं।

 

10. डॉ नीता सक्सेना बताती हैं कि एक अच्छा सुखमय जीवन जीने के लिए स्वस्थ और सेहतमंद होना अत्यंत आवश्यक है स्वस्थ मन होगा स्वस्थ तन होगा तभी हम अच्छे से कार्य कर पाएंगे। हमें अपनी पुरानी पद्धति की ओर लौटना होगा जैसे योग और मेडिटेशन पर विशेष ध्यान देना होगा। तभी हम ऊर्जा के साथ कार्य कर पाएंगे हमें अपनी दिनचर्या और खाने- पीने पर विशेष ध्यान देना होगा। सुपाच्य भोजन योग और व्यायाम स्वस्थ रहने के मूल मंत्र हैं अच्छी नींद मानसिक तनाव कम करती है।

 

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *