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“डॉक्टर्स डे” पर विशेष : “डॉक्टर्स डे” पहले भी था आज भी है…..

“डॉक्टर्स डे” पर विशेष –

“डॉक्टर्स डे” पहले भी था आज भी है….

– Vivek Kumar

यूं तो ‘डॉक्टर्स डे’ हर साल 1 जुलाई को मनाया जाता है लेकिन डॉक्टर द्वारा मरीज की जीवन यात्रा को मृत्यु से अमृत्व की ओर ले जाती है। भारतीय सनातन परंपरा में ‘डॉक्टर्स डे’ को हम लोग दिवाली की धनतेरस को धन्वंतरि जयंती के रूप में मनाते हैं। जिन्होंने इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान हाथ में अमृत कलश लिए हुए मानव मात्र को आरोग्यता और अमृत्व का वरदान दिया आयुर्वेद में जीवन पद्धति को इसी विधा से जोड़कर जीवंत बनाया गया। यहां तक की भगवान विष्णु जो भगवान धन्वंतरि के अवतार माने जाते हैं के अच्युत, अनंत, केशव नाम के मंत्रों में भगवान ने इतनी ताकत और ऊर्जा भर दी कि इनके उच्चारण और जप मात्र से दवाई काम करने लगते हैं और मनुष्य के स्वास्थ्य में और हर हाल में सुधार होता है इन्ही नामो का जप करते हुए इस्कॉन हरे कृष्ण संस्था की एक भक्त महिला ने हाथ में जल लेकर पवित्र होते हुये हार्ट अटैक के मरीज को तुरंत सिर पर हाथ फेरते हुए नियंत्रित व स्वस्थ किया। यह एक सच्ची घटना है जो की एक वायुयान में घटित हुई थी इन्हीं सब बातों को लेकर हमने कुछ डॉक्टर से संपर्क साधा, जिन्होंने अपने विचार कुछ इस तरह व्यक्त किये कि डॉक्टर क्या सोचते हैं।

मेरे इन्हीं शब्दों से भाव विभोर होते हुए ओम आयुर्वेद केंद्र के डॉ. एस के पांडे पूर्व चिकित्सक लोहिया चिकित्सा विश्वविद्यालय ने कहा कि आपने तो मेरे मन को छू लिया और इसे ही ध्यान में रखकर भगवान धन्वंतरि की पूजा करके सेंटर को जन सेवा में समर्पित किया। जब तक मेरा जीवन है प्राणी मात्र की सेवा में सतत प्रयत्नशील रहूंगा।

पास बैठे एक सज्जन ने बताया कि डॉक्टर साहब की एक खूबी यह है कि मरीज की पीड़ा संबंधी बातों को सुनकर सकारात्मक आश्वासन और उपचार देते हैं फीस की परवाह न करते हुए उनका उद्देश्य आने वाले हर मरीज को पूरा समय देकर पहले उसे तसल्ली देते हैं कि आप भगवान धन्वंतरि के कृपा से अवश्य ठीक होंगे। बैठे मरीजों ने भी इस बात की पुष्टि की वास्तव में डॉक्टर साहब हम लोगों की पीड़ा को हर लेते हैं और उन पर उनके मरीजों पर भगवान धन्वंतरि की बड़ी कृपा है डॉक्टरों को प्रोत्साहित करने व उनका तथा मरीजों का मनोबल बढ़ाते रहने के लिए हर साल ये आयोजन होते हैं और आम जनता की नकारात्मक सोच को सकारात्मकता प्राप्त होती है।

2.‌ सचिवालय डिस्पेंसरी की वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. नमिता सिंह बताती है कि जब मैं 14 साल की प्रैक्टिस पीछे मुड़कर देखती हूँ, तो महसूस होता है कि चिकित्सा केवल पेशा नहीं, सतत ज़िम्मेदारी है।
एक लेडी डॉक्टर के रूप में यह ज़िम्मेदारी दोहरी हो जाती है – क्लिनिकल उत्कृष्टता और सामाजिक संवेदनशीलता दोनों निभानी होती हैं।
आज की स्वास्थ्य प्रणाली जटिल है। मरीज सूचनात्मक हैं, अपेक्षाएँ ऊँची हैं, और निर्णय साक्ष्य-आधारित होने चाहिए। ऐसे समय में डॉक्टर का काम सिर्फ रोग का निदान नहीं, मरीज को सही जानकारी देकर सशक्त बनाना भी है।
महिला डॉक्टर होने के कारण मैं देखती हूँ कि कई महिला मरीज खुलकर अपनी समस्या साझा कर पाती हैं, विशेषकर प्रजनन स्वास्थ्य और मानसिक तनाव से जुड़े मुद्दों पर। यह विश्वास बनाना ही चिकित्सक की आधी सफलता है।
इस पेशे की सबसे बड़ी चुनौती भावनात्मक भार है। हर मृत्यु के बाद सामान्य होना, हर ठीक हुए मरीज के साथ खुश होना – यह संतुलन सीखना पड़ता है। पर यही संतुलन हमें मानवीय रखता है।
डॉक्टर्स डे का संदेश स्पष्ट है: विज्ञान के साथ करुणा, तकनीक के साथ नैतिकता, और उपचार के साथ सम्मान।
आइए हम सभी डॉक्टर मिलकर मरीज-केंद्रित, सुरक्षित और पारदर्शी स्वास्थ्य सेवा को प्राथमिकता दें। तभी “स्वस्थ भारत” का लक्ष्य वास्तविक बनेगा।
समस्त चिकित्सा बंधुओं को डॉक्टर्स डे की हार्दिक बधाई।

3. आजमगढ़ के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विनय कुमार सिंह के अनुसार भारत के प्रसिद्ध चिकित्सक बिधान चंद्र राय को श्रद्धांजलि और सम्मान देने के लिए 1 जुलाई को उनकी जयंती और पुण्यतिथि मनाई जाती है उनका सम्मान और श्रद्धांजलि देने के लिए उनके नाम पर डॉ. बी.सी. राय राष्ट्रीय पुरस्कार की शुरुआत हुई। उनका कहना है कि डॉक्टर राय एक अच्छे इंसान के साथ एक बेहतरीन डॉक्टर भी थे उन्हें इसलिए भी याद किया जाता है कि हमारे डॉक्टर फैकल्टी में भी उन्हें साक्षी मानकर संकल्प लिया जाता है कि हम अपने जीवन पर जो विद्या अर्जित किए हैं उसका उपयोग मानवता की सेवा में लगायेंगे। डॉक्टर का हमारे समाज में एक अहम स्थान है। अपनी छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी बीमारियों को लेकर लोग डॉक्टर के पास इसी उम्मीद के साथ जाते हैं कि वह बिल्कुल ठीक हो जाएंगे। डॉक्टर भी मरीज को ठीक करने में अपनी पूरी मेहनत लगा देते हैं इस दिन डॉक्टर के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त किया जाता है। यहां तक की जो भी पीड़ित जन है उनकी पीड़ा हम काफी हद तक कम कर सकते हैं उनकी सेवा हम पूरी ईमानदारी से करेंगे पारदर्शिता रखेंगे, प्रोफेशन जो हमारा है ईमानदारी से करेंगे। उनके दिए गए निर्देशों और आदेशों के पद चिन्हों पर चलना हम सबका कर्तव्य है।

4. सचिवालय के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ बृजेश कुमार सिंह का कहना है कि डॉक्टर और मरीज का रिश्ता केवल इलाज का नहीं, बल्कि विश्वास, संवेदना और आशा का होता है। मरीज दवा के साथ-साथ सम्मान, अपनापन और भरोसे की भी अपेक्षा करता है। एक डॉक्टर के संवेदनशील शब्द, विनम्र व्यवहार और थोड़ा सा समय मरीज के मन में नई उम्मीद जगा सकता है। यही मानवीय संवेदना चिकित्सा सेवा की सबसे बड़ी पहचान और सबसे बड़ी शक्ति होती है। उनका मानना है कि बुरे विचार ईर्ष्या, क्रोध आदि रक्त में विकार उत्पन्न करते हैं और तभी शरीर में रोगाणुओं तथा विषाणुओं की वृद्धि होती है। जिस प्रकार के विचार अच्छे या बुरे उठते रहते हैं, उसी तरह के रक्तकण शरीर को सशक्त या कमजोर बनाते रहते हैं।

5. फिजियोथैरेपिस्ट नम्रता मल्होत्रा कहती हैं कि एक फिजियोथेरेपिस्ट के रूप में, यह दिन मेरे लिए विशेष महत्व रखता है। हालाँकि हमारे उपकरण अक्सर स्टेथोस्कोप और प्रिस्क्रिप्शन पैड के बजाय हमारे हाथ, व्यायाम निर्देश और पुनर्वास योजनाएं होते हैं, फिर भी हमारा मूल उद्देश्य एक ही है: जीवन की गुणवत्ता को बहाल करना और लोगों को उनकी स्वतंत्रता वापस पाने में मदद करना। फिजियोथेरेपी में मेरी यात्रा ने मुझे सिखाया है कि उपचार रातों रात चमत्कार नहीं होता, यह धैर्य और दृढ़ता की एक सुंदर, सहयोगात्मक प्रक्रिया है। किसी मरीज को दीर्घकालिक दर्द या गतिहीनता की स्थिति से निकालकर उसे बिना किसी सहायता के अपने पहले कदम उठाते हुए देखना, अपने पसंदीदा खेल में वापस लौटते हुए देखना, या बस दर्द-मुक्त जीवन जीते हुए देखना, इससे अधिक संतोषजनक कुछ भी नहीं है।
आज, मुझे इतने समर्पित चिकित्सा पेशेवरों के साथ काम करने पर बेहद गर्व है, और हम सभी दुनिया को गतिशील, स्वस्थ और समृद्धि बनाए रखने में जिस तरह से योगदान देते हैं, उसका जश्न मना रहे हैं।

6. डॉक्टर्स डे के अवसर पर डॉ0 श्वेता, कलित स्किन केयर सेंटर के अनुसार हम समाज के हर उस व्यक्ति का आभार व्यक्त करते हैं, जो स्वास्थ्य के प्रति जागरुक है। उनका मानना है कि स्वास्थ्य केवल क्लीनिक की चार दिवारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक स्वस्थ समाज की नींव है। हमारा प्रयास केवल उपचार देना नहीं, बल्कि आत्मविश्वास के माध्यम से समाज को बेहतर बनाना भी है। इस डॉक्टर्स डे पर हम साथ मिलकर एक स्वस्थ और जागरूक जीवन शैली अपनाने का संकल्प लें। आपकी मुस्कान, हमारा गौरव।

7. शिवम होम्योपैथिक क्लीनिक के डॉक्टर मनोज कुमार श्रीवास्तव डॉक्टर्स डे पर बताते हैं कि एक बार मेरे पास अहमद खान नाम का एक पेशेंट आया था, जिसे किडनी में स्टोन था वह भी 16 एम. एम. का। उसने मुझे बताया कि मुझे काफी दर्द होता है और डॉक्टर ने मुझे किडनी स्टोन बताया है और ऑपरेशन करने की सलाह दी है पर मैं बहुत गरीब हूं इतने पैसे कहां से लाऊंगा। तभी मैंने उसको एक हफ्ते की दवा दी और वही स्टोन टूट कर यूरिन के जरिए निकल गया। एक हफ्ते बाद वह आराम महसूस करने लगा। पथरी के पेशेंट होम्योपैथिक दवा से ठीक भी हो जाते हैं। वह आगे बताते हैं कि इस समय हीट वेव चल रहा है गर्मी बहुत ज्यादा है। इसलिए पानी खूब पिए। और दोपहर की धूप में न निकलें। अगर बाहर निकलना बहुत ही जरूरी है तो कम से कम सर पर अंगोछा बांध कर और खूब पानी पीकर ही बाहर निकले।

8. सुभाष क्लीनिक के डॉक्टर राहुल सिंह का कहना है कि मात्र चिकित्सक को धरा का देव मान लेने से काम नहीं चलता। मरीज को चिकित्सक पर विश्वास भी करना चाहिए। गूगल एवं अन्य माध्यमों से अपना स्वयं का उपचार करने से लोगों को बचना चाहिए। डॉ. राहुल आगे कहते हैं कि उपचार कोई जादू नहीं है जहां पर्ची निकाल कर छू बोलकर हम रोगियों को ठीक कर दें। उपचार में समय लगता है और चिकित्सक द्वारा बताई गई दवाइयां ससमय लेने पर निश्चित रूप से लाभ होगा। कभी-कभी ऐसे मरीज भी आ जाते हैं जो की कहते हैं कि डॉक्टर साहब कोई ऐसी दवाई दीजिए कि तुरंत आराम हो जाए डॉक्टर को भी समझना पड़ता है कि मरीज को किस तरह की समस्या है।उसकी बीमारी को समझ कर ही दवा देना उचित होगा तभी मरीज का डॉक्टर के प्रति विश्वास बना रहेगा।

9. डॉ प्रसून कुमार त्रिपाठी का मानना है कि हमारे देश का उज्जवल भविष्य युवाओं पर टिका होता है अगर युवा पीढ़ी ही गलत रास्ते पर जाने लगे तो निश्चित ही उनका भविष्य अंधकार में चला जाता है कुछ युवा नशे की लत में अपनी जिंदगी गुजर रहे हैं बल्कि ऐसा करने से उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। स्वस्थ समाज का निर्माण हम सभी लोगों की जिम्मेदारी है इसलिए आप सभी लोगों को संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद लेना बेहद जरूरी है समय-समय पर अपने स्वास्थ्य की जांच कराते रहें। आपका स्वास्थ्य हमारी पहली प्राथमिकता है और हम सभी लोग आपस में मिलकर एक स्वस्थ जीवन शैली के लिए जागरूक बने क्योंकि एक स्वस्थ शरीर में एक स्वस्थ मन का विकास होता है।

10. पूर्व वरिष्ठ अधिकारी मनोज कुमार शुक्ल का कहना है कि आमतौर पर भारतीय समाज में डाक्टर्स को बहुत धनवान और साधन सम्पन्न माना जाता है। लेकिन मैंने, एक डाक्टर बेटी का पिता और एक डाक्टर का श्वसुर होने एवं विगत ग्यारह वर्षों से उनके साथ रहने के पश्चात, यह अनुभव किया है कि डाक्टर्स का जीवन एक साधक का जीवन होता है। डाक्टर्स डे के अवसर पर मैं अपनी डा. बेटी और सर्जन दामाद के कुछ अनुभव साझा करना चाहता हूं।
एक बार मेरी बेटी और दामाद पिक्चर देखने गए थे। उसी समय अस्पताल से फोन आया कि एक मरीज की हालत खराब है। वे तुरंत पत्नी को अकेला छोड़कर अस्पताल चले गए।
इसी प्रकार एक बार ये दोनों पति-पत्नी रात्रि भोज के लिए बाहर गए हुए थे। खाना शुरू ही हुआ था कि अस्पताल से इमरजेंसी केस का फोन आ गया। वे खाना और पत्नी को अकेला छोड़कर तुरंत अस्पताल चले गए।
इसी प्रकार चाहे मेरी बेटी बीमार हो या घर में बच्चे बीमार हों या हम लोग, डाक्टर्स दम्पति समय-असमय आवश्यकता पड़ने पर तुरंत अस्पताल चले जाते हैं।
मेरी बेटी को भी प्रायः अस्पताल के कार्य, कांफ्रेंस आदि के लिए प्रायः अस्पताल, या शहर, या प्रदेश अथवा देश के बाहर भी जाना पड़ता है। ऐसे अनगिनत किस्से हैं।
शुक्र है कि हम लोग हैं तो बच्चों की देखरेख कर लेते हैं लेकिन पूरा घर-परिवार मेड के भरोसे छोड़कर जाना आजकल के समय में बहुत ख़तरनाक हो सकता है।
मित्रों, मैंने बहुत नज़दीक से देखा है कि डाक्टर्स का जीवन बहुत कष्टसाध्य होता है। इसलिए सदैव डाक्टरों का सम्मान करें।
डाक्टर्स डे के अवसर पर वसुधा के सभी डाक्टरों को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई।

11. डॉ. अश्वनी कुमार मल्होत्रा बताते हैं कि हमारे देश में हर साल 1 जुलाई को डॉक्टर दिवस मनाया जाता है। संयोगवश, डॉ बी.सी. राय जन्म 1 जुलाई 1882 को ही हुआ था और 1962 में इसी दिन उनका निधन हो गया। उन्हें 80 वर्ष की आयु में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। डॉक्टर दिवस मरीजों और डॉक्टरों के प्रति आभार व्यक्त करने का दिन है। इस अवसर पर डॉक्टर कोई कार्यक्रम आयोजित करते हैं या अपने डॉक्टर के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं।डॉक्टर दिवस पर मैं अपने सभी प्रोफेसरों, वरिष्ठों और कनिष्ठ सहयोगियों को उनके मार्गदर्शन और सहयोग के लिए धन्यवाद देता हूं, जिन्होंने मुझे एक सक्षम डॉक्टर बनाया है। साथ ही, मैं अपने उन मरीजों को भी धन्यवाद देता हूं जिन्होंने हमेशा मुझ पर भरोसा किया और अपनी बीमारियों के इलाज के लिए मुझ पर विश्वास जताया।
एक डॉक्टर को न केवल चिकित्सा और सर्जरी का पर्याप्त ज्ञान होना चाहिए, बल्कि अपने मरीजों के प्रति दयालु, विनम्र और करुणामय भी होना चाहिए।
“डॉक्टर साहब, तुस्सी रब हो, तुस्सी मेरी जान बचा लाई। तुस्सी मैनु ठीक कर देता।”
कृतज्ञता और प्रशंसा के ये शब्द लाखों हीरों से भी अधिक मूल्यवान हैं और हम डॉक्टरों के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार हैं। जब कोई मरीज हमें यह कहता है तो हम उन सभी रातों को भूल जाते है जो हमने जाग कर काटे, हर चुनौती और हर मुश्किल का सामना करने में सहायता करते है।
मैं डॉक्टर बनकर धन्य हो गया हूँ। मेरा सफ़ेद कोट मेरी आन व शान है और मेरा डॉक्टर बनकर हर मरीज की सेवा करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।

12. भाऊ राव देवरस संयुक्त चिकित्सालय महानगर के सीएमएस डॉ.आर.के दीक्षित डॉक्टर्स डे पर संदेश देते हैं कि इस समय मौसम को देखते हुए गर्मी का माहौल बहुत ज्यादा है इसलिए इस समय लोग एसी का प्रयोग बहुत ज्यादा करते हैं ऐसे में एसी को 24 से नीचे बिल्कुल ही न चलाये उससे ऊपर ही चलाएं। और हर 2 घंटे बाद उसे बंद कर दें। इस उमस भरी गर्मी में खुले एरिया में कम रहें। छायादार स्थान पर ही रहें। हाइड्रेशन मेंटेन करें। पानी और छाछ पीते रहे। बच्चों का विशेष ख्याल रखें । ओआर एस का घोल अपने पास जरूर रखें। ताकि जरूरत पड़ने पर उसे तुरंत दिया जा सके। पर्याप्त हाइड्रेशन बनाए रखने के लिए पर्याप्त तरल पदार्थ पीना और पानी से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करना आवश्यक है।

 

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