डॉ. आकांक्षा उपाध्याय द्वारा AIIMS में प्रस्तुत की गई जीबीएस बीमारी संबंधी केस स्टडी बनी मरीजों के लिए उम्मीद की किरण

नई दिल्ली/लखनऊ। राजधानीे दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में नेशनल काॅन्फ्रेंस आॅन एलाइड हेल्थ एंड रिहैबिलिटेशन साइंसेज (एनसीएएचआरएस) पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में लखनऊ की वरिष्ठ न्यूरो फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. आकांक्षा उपाध्याय द्वारा गिलियन-बार्रे सिंड्रोम (जीबीएस) बीमारी संबंधी केस स्टडी प्रस्तुत की गई। इस केस स्टडी में प्रस्तुत सुनियोजित और वैज्ञानिक तरीकों से इस बीमारी में सकारात्मक सुधार सामने आए हैं जो इस बीमारी से ग्रसित मरीजों के लिए उम्मीद की किरण बन कर सामने आया है।
डॉ. आकांक्षा उपाध्याय द्वारा प्रस्तुत इस केस स्टडी का शीर्षक था ‘स्ट्रक्चर्ड फिजिकल थेरेपी के जरिए फंक्शनल रिकवरी’, जिसमें 11 साल की एक बच्ची के सफल रिहैबिलिटेशन (पुनर्वास) का विस्तार से वर्णन किया गया था। इस अध्ययन में यह बताया गया कि कैसे एक सुनियोजित और वैज्ञानिक रूप से तैयार किए गए 8-सप्ताह के फिजियोथेरेपी कार्यक्रम से मरीज की मांसपेशियों की ताकत, संतुलन, चलने की क्षमता और रोजमर्रा के कामों में आत्मनिर्भरता में काफी सुधार हुआ।
इलाज के दौरान, बच्ची को धीरे-धीरे गतिशीलता बढ़ाने वाले व्यायाम, जोड़ों की गति सीमा बढ़ाने वाले व्यायाम, धीरे-धीरे प्रतिरोध बढ़ाने वाला प्रशिक्षण, चलने का प्रशिक्षण और संतुलन बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। इसके अलावा, मांसपेशियों को सक्रिय करने और धड़ पर नियंत्रण बेहतर बनाने के लिए फंक्शनल इलेक्ट्रिकल स्टिम्युलेशन और वर्चुअल रियलिटी-आधारित व्यायामों का भी इस्तेमाल किया गया।
हाल के वर्षों में, जीबीएस बीमारी के मामलों में काफी बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे इस तरह के प्रभावी रिहैबिलिटेशन मॉडल्स का महत्व और भी बढ़ गया है।
डॉ. आकांक्षा उपाध्याय का शोध इस बात पर जोर देता है कि अगर सही समय पर और व्यवस्थित तरीके से रिहैबिलिटेशन शुरू किया जाए, तो गिलियन-बैरे सिंड्रोम जैसी जटिल बीमारियों में भी सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।
लखनऊ के इन्दिरा नगर स्थित एक्स्ट्रा केयर फिजियोथैरेपी प्रा.लि. के डायरेक्टर डाॅ0 संतोष उपाध्याय एवं अन्य कई चिकित्सकों द्वारा इस उपलब्धि पर डॉ. आकांक्षा उपाध्याय को हार्दिक बधाई दी गई। डाॅ0 संतोष उपाध्याय ने बधाई देते हुए कहा कि हम आशा करते हैं कि भविष्य में भी इस प्रकार के शोध एवं नवाचार के माध्यम से मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलती रहेंगी।












