चित्रकूट : भीषण गर्मी में गौवंशों के लिए हाईटेक गौशाला, ठंडे पानी-हवा के लिए विशेष व्यवस्था

– Virendra Shukla
चित्रकूट। भीषण गर्मी के इस मौसम में जहां लोग राहत पाने के लिए झरनों और वाटर फॉल का सहारा ले रहे हैं, वहीं धर्म नगरी चित्रकूट की श्री सदगुरू गौशाला इन दिनों अपनी अनोखी व्यवस्था को लेकर चर्चा में है। यहां रहने वाले गौवंशों की देखभाल किसी आम पशु की तरह नहीं,बल्कि परिवार के सदस्य की तरह की जा रही है। सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट द्वारा संचालित हाईटेक गौशाला में गर्मी से बचाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं, जिनका लाभ करीब 1300 गौवंश उठा रहे हैं। आप को बता दे कि चित्रकूट स्थित सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट की यह गौशाला लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यहां भीषण गर्मी में गौवंशों को राहत देने के लिए आधुनिक शॉवर सिस्टम लगाया गया है। इस व्यवस्था के तहत गायों को समय-समय पर स्नान कराया जाता है, जिससे उन्हें तेज धूप और उमस से राहत मिलती है, इंसानों की तरह ठंडे पानी के शॉवर से नहलाए जाने के कारण गौवंश काफी आराम महसूस करते हैं। गौशाला में केवल स्नान की ही व्यवस्था नहीं है, बल्कि साफ-सफाई, पीने के स्वच्छ पानी और ठंडी हवा के लिए पंखों की भी विशेष व्यवस्था की गई है,और गौवंशों के रहने के स्थानों पर बड़े टीन शेड बनाए गए हैं ताकि सीधी धूप का असर उन पर न पड़े और उन्हें पंखों के नीचे रखा जाता है। जिससे वे लू और गर्म हवाओं से सुरक्षित रह सकें।

वही श्री सदगुरु गौ सेवा केंद्र की अध्यक्ष ऊषा जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट 30 वर्षों से लगातार गौसेवा का कार्य कर रहा है। वर्तमान में यहां लगभग 1300 गौवंशों की देखभाल की जा रही है,उन्होंने बताया कि ट्रस्ट के डायरेक्टर स्वर्गीय पद्मश्री डॉ. बी के जैन ने अपने जीवनकाल में गौसेवा को हमेशा प्राथमिकता दी और दिन-रात इसके लिए कार्य किया. उन्हीं की प्रेरणा से ट्रस्ट लगातार गौवंशों के लिए नई सुविधाएं विकसित कर रहा है। उन्होंने आगे की जानकारी में बताया कि इस बार बढ़ती गर्मी को देखते हुए गौमाताओं के लिए विशेष शॉवर सिस्टम लगवाया गया है जिसमें अलग-अलग समय पर गौवंशों को स्नान कराया जाता है ताकि सभी को इसका लाभ मिल सके, उन्होंने कहा कि सुबह 11 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक, जब गर्मी अपने चरम पर होती है, तब गौवंशों को टीन शेड और पंखों के नीचे रखा जाता है, इससे उन्हें गर्मी से राहत मिल सके।








