
नई दिल्ली। भारत के विदेश मंत्रालय ने नॉर्वे के प्रेस और वहां के पत्रकारों को प्रेस की स्वतंत्रता के मुद्दे पर कड़ा जवाब दिया है। मंत्रालय का स्पष्ट कहना है कि बहुत से विदेशी लोग अज्ञानी एनजीओ द्वारा प्रकाशित भ्रामक रिपोट्र्स को पढक़र भारत के बारे में गलत धारणा बना लेते हैं और उन्हें भारत की विशालता का कोई अंदाजा नहीं है। नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में आयोजित एक प्रेस कॉन्फेें्रस के दौरान भारतीय विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज की नॉर्वे की एक पत्रकार हेला लेंग के साथ तीखी बहस हुई। जब उनसे भारत में मानवाधिकार और प्रेस की आजादी को लेकर सवाल किया गया, तो सिबी जॉर्ज ने भारत के विशाल मीडिया इकोसिस्टम की ताकत और उसकी पहुंच को गिनाते हुए करारा जवाब दिया। महिला पत्रकार ने सिबी जॉर्ज से पूछा कि दुनिया भारत पर भरोसा क्यों करे और क्या भारत में मानवाधिकार उल्लंघन बंद होंगे?
इसके अलावा पत्रकार ने ये भी पूछा कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय मीडिया के कठिन सवालों का जवाब देना शुरू करेंगे? सिबी जॉर्ज ने महिला पत्रकार के सवालों के जवाब देते हुए कहा कि भारत सिर्फ एक देश नहीं है, बल्कि ये पांच हजार साल पुरानी सभ्यता है। देश की पहचान उसकी आबादी, सरकार, संप्रभुता और क्षेत्र से होती है और दुनियाभर में भारत इन मामलों में मजबूत स्थित में है। भारत ने दुनिया को काफी चीजें दी हैं, फिर चाहें वे कोरोना का समय ही क्यों न हो, तब भी भारत, दुनिया से अलग नहीं रहा बल्कि जिन्हें उसकी जरूरत थी, उनके लिए भारत खड़ा हुआ। यही वो वजह है कि दुनिया भारत पर विश्वास करती है। जॉर्ज ने कहा कि हमारे पास एक संविधान है जो जनता के मौलिक अधिकारों की गारंटी देता है। भारत में देश की महिलाओं के लिए समान अधिकार हैं।






