
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने बुधवार को संसद में मोबाइल रिचार्ज का मुद्दा उठाया। राघव चड्ढा ने प्रीपेड रिचार्ज खत्म होने पर इनकमिंग कॉल ब्लॉक करने के लिए टेलीकॉम कंपनियों की आलोचना की। उन्होंने रेगुलेटर्स से कंज्यूमर्स की सुरक्षा करने की अपील की। सांसद ने कहा कि वैलिडिटी खत्म होने के बाद भी यूजर्स को कॉल मिलनी चाहिए। इस बात से टेलीकॉम पॉलिसी पर बहस छिड़ गई है। सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि अगर कोई रिचार्ज प्लान एक्सपायर हो जाता है तो आउटगोइंग कॉल्स बंद होना समझ में आता है, लेकिन इनकमिंग कॉल्स भी क्यों बंद कर दी जाती हैं? एक बार वैलिडिटी खत्म हो जाने पर लोगों से संपर्क नहीं हो पाता है और बैंक ओटीपी जैसे जरूरी मैसेज भी नहीं आ पाते हैं। एमरजेंसी या अर्जेंट सिचुएशन में इससे कोई व्यक्ति पूरी तरह से कट सकता है। राघव चड्ढा ने कहा कि मेरी सरकार से मांग है कि आखिरी रिचार्ज के बाद कम से कम एक साल तक इनकमिंग कॉल्स और एसएमएस आते रहें, ताकि जरूरी कम्युनिकेशन बंद न हो।
दूसरी मांग यह है कि आखिरी रिचार्ज के बाद कम से कम तीन साल तक मोबाइल नंबर डीएक्टिवेट नहीं किया जाना चाहिए। टेलीकॉम ऑपरेटर्स को उन यूजर्स के लिए कम कीमत वाला ‘सिर्फ इनकमिंग’ प्लान लाना चाहिए, जिन्हें सिर्फ जरूरी कॉल्स, ओटीपी और सरकारी सर्विस के लिए अपना नंबर एक्टिव रखना होता है। आम आदमी पार्टी के सांसद ने कहा कि मैंने 28 दिन के रिचार्ज ‘मंथली’ प्लान्स का भी मुद्दा उठाया। अगर किसी चीज को मंथली कहा जाता है तो उसे 30-31 दिनों के कैलेंडर महीने के हिसाब से होना चाहिए। 28 दिन के साइकल की वजह से कंज्यूमर को असल में एक साल में 13 रिचार्ज के लिए पेमेंट करना पड़ता है। (28 दिन 3 13 रिचार्ज = 364 दिन)। टेलीकॉम ऑपरेटर्स को अपने रिचार्ज प्लान को असली कैलेंडर महीनों के साथ सिंक करना चाहिए, न कि 28 दिन के प्लान के साथ। आज मोबाइल फोन कोई लग्जरी नहीं है। यह एक लाइफलाइन है। प्रीपेड रिचार्ज कस्टमर फेयरनेस और ट्रांसपेरेंसी के हकदार हैं।









