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अपनी हार को समझौते का नाम न दे अमरीका, जंग रोकने के लिए ट्रंप द्वारा प्रस्ताव का ईरान ने उड़ाया मजाक

तेहरान। जंग रोकने के लिए अमरीका द्वारा प्रस्तावित 15 सूत्रीय योजना का ईरान ने मजाक उड़ाते हुए इस खारिज कर दिया है। ईरान ने दो टूक कहा है कि जंग रोकने पर कोई भी सहमति अब केवल ईरान की शर्तों पर ही बनेगी। ईरान की नियमित सेना और अद्र्धसैनिक बल रिवोल्यूशनरी गार्ड की संयुक्त रूप से कमान संभालने वाले खातम अल-अन्बिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल इब्राहिम जुल्फाघारी ने 15 सूत्रीय योजना को पाकिस्तान के जरिए ईरान को सौंपे जाने के बाद कहा कि आप जिस ताकत की बात करते थे, वह अब नाकामी में बदल गई है। आप खुद को दुनिया की महाशक्ति कहते हैं, लेकिन अगर यह ताकत आपके पास होती, तो अब तक इस जंग को जीत चुके होते। अपनी हार को समझौते का नाम मत दीजिए। आपके खोखले वादों का दौर अब खत्म हो चुका है। पहले दिन से ही हमारी पहली और आखिरी बात यही रही है और यही रहेगी कि हम जैसे लोग आप जैसे लोगों के साथ कभी समझौता नहीं करेंगे। न अभी, न कभी। उधर, ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने कहा है कि तेहरान क्षेत्र में अमरीका की हर गतिविधि, खासकर सैनिकों की तैनाती, पर करीब से नजर रख रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि जनरलों ने जो नुकसान किया है, उसे सैनिक ठीक नहीं कर सकते। हमारे इरादे परखने की कोशिश मत करो। जानकारी के मुताबिक, अमरीका ने पाकिस्तान के जरिए ईरान को युद्ध खत्म करने के लिए 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव भेजा है, जिसमें एक महीने तक सीजफायर का प्रस्ताव भी ट्रंप की तरफ से दिया गया है, ताकि जंग खत्म करने को लेकर बातचीत की जा सके। इस प्रस्ताव में कहा गया है कि ईरान को अपनी सभी परमाणु क्षमताओं को पूरी तरह खत्म करना होगा। ईरान अपनी धरती पर यूरेनियम संवर्धन का काम पूरी तरह बंद करेगा।

ईरान को लिखित और स्थायी प्रतिबद्धता देनी होगी कि वह कभी भी परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं करेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह फ्री मैरीटाइम जोन घोषित किया जाएगा। इसके अलावा बैलिस्टिक मिसाइलों की रेंज और स्टॉक पर सख्त सीमाएं तय करने की बात कही गई है तथा ईरान को मिडिल ईस्ट में सक्रिय अपने सहयोगी गुटों (जैसे हिजबुल्लाह या हूती) को हथियार और पैसा देना बंद करना होगा। अगर ईरान ये शर्तें मानता है, तो अमरीका उस पर लगे सभी परमाणु प्रतिबंध हटा लेगा। ईरान को नाभिकीय रिएक्टर जैसे शांतिपूर्ण कार्यों के लिए सिविलियन न्यूक्लियर एनर्जी प्रोग्राम चलाने में मदद दी जाएगी। स्नैपबैक मैकेनिज्म को हटा दिया जाएगा, जिससे प्रतिबंध दोबारा अपने आप लागू नहीं होंगे। इस पूरे समझौते पर विस्तार से बात करने के लिए अमरीका ने 30 दिनों के युद्धविराम का प्रस्ताव दिया है, ताकि दोनों पक्ष इस दौरान किसी स्थायी समाधान पर बात कर सकें। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब अमरीका की सेना 82वीं एयरबोर्न डिवीजन से कम से कम 1,000 और सैनिकों को तैनात करने की तैयारी कर रही है, ताकि क्षेत्र में पहले से मौजूद करीब 50,000 सैनिकों को और बल मिल सके। ईरान के खिलाफ युद्ध जारी रखने की वकालत कर रहे इजरायली अधिकारी अमरीकी प्रशासन द्वारा युद्धविराम योजना सौंपे जाने से हैरान हैं। उधर, ईरान ने दावा किया है कि उसने अमरीका के जंगी जहाज एयरक्राफ्ट कैरियर यूएस अब्राहम लिंकन पर मिसाइल हमला किया, जिसके बाद उसे इलाका छोडक़र पोजिशन बदलनी पड़ी।

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