
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी राज्य में चुनाव के बाद हुई हिंसा के संबंध में अपनी पार्टी की ओर से दायर एक मामले की व्यक्तिगत रूप से पैरवी करने के लिए अधिवक्ता की पोशाक में कोलकाता उच्च न्यायालय पहुंचीं। उन्होंने टीएमसी के नेता कल्याण बनर्जी के बेटे सिरसान्या बनर्जी की ओर से दायर अर्जी पर दलीलें देते हुए अदालत से कार्यकर्ताओं की रक्षा के लिए आदेश जारी करने की अपील की। उन्होंने जस्टिस सुजॉय पॉल और जस्टिस पार्थसारथी सेन के समक्ष कहा कि भाजपा के चुनाव जीतने के बाद से हिंसा का दौर चल रहा है। लूटपाट हो रही है और कई जगहों से मारपीट की खबरें भी आई हैं।
जनहित याचिका में कहा गया है कि भाजपा सरकार बनने के बाद से तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता निशाने पर हैं। इसके अलावा अन्य सामान्य नागरिक भी टारगेट किए जा रहे हैं। ममता बनर्जी ने अदालत से मांग की कि वह आदेश दे, ताकि नागरिकों की हिंसा और गुंडागर्दी से रक्षा हो सके। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि इस हिंसा में महिलाओं, बच्चों और अल्पसंख्यकों तक को नहीं बख्शा जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस हिंसा के दौरान टीएमसी के 10 कार्यकर्ता मारे जा चुके हैं।







