
नई दिल्ली। अयोध्या स्थित राम मंदिर में दिए गए दान में हेराफेरी के विरोध में शुक्रवार को संसद परिसर में पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव के गेरुआ कपड़े पहनकर किए गए नाटक पर विवाद खड़ा हो गया। भाजपा ने इसे सनातन का अपमान बताते हुए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर इसमें शामिल होने का आरोप लगाया। वहीं, विपक्ष ने भाजपा पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि दान चोरी के मामले में मुख्य आरोपी के खिलाफ क्या बड़ी कार्रवाई की गई है। संसद परिसर में भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने कहा कि देश की आजादी से लेकर अब तक कांग्रेस, और अब प्रियंका गांधी, राहुल गांधी और पूरे विपक्ष ने लगातार संतों, भगवा और सनातन का अपमान किया है। जिस तरह से उन्होंने अपने विरोध-प्रदर्शन में भगवान राम और चंदे का जिक्र करके और कालनेमि जैसा व्यवहार करके सनातन का अपमान करने की कोशिश की। देश की जनता यह सब देख रही है और अगले चुनाव में उन्हें सबक सिखाएगी। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाया कि उन्होंने सांसद पप्पू यादव को साधु के भेष में तैयार किया और उन्हें चंदा चोर कहा। यह देश और कांग्रेस व समाजवादी पार्टी जैसी राजनीतिक पार्टियों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है, जिन्होंने वोटों के लिए सनातन को बदनाम करने का काम किया है। सनातन इसका जवाब देगा और यह एक ऐसा अपराध है, जिसे हम कभी माफ नहीं करेंगे।
भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा कि अगर आप संत के कपड़े पहनते हैं और फिर यह कहते फिरते हैं कि संत पैसे या डोनेशन चुराते हैं, तो यह परंपरा का अपमान है। इस तरह का गलत बर्ताव पार्लियामेंट में नहीं हो सकता। भले ही आप (पप्पू यादव) कांग्रेस के साथ हों, इसका मतलब यह नहीं है कि आप सनातन का विरोध कर सकते हैं। भाजपा सांसद बृज लाल ने कहा कि इस तरह का ड्रामा संतों, ऋषियों, हिंदू धर्म और सभी हिंदुओं का अपमान है। पप्पू यादव को याद रखना चाहिए कि संत समाज उन्हें कभी माफ नहीं करेगा। उधर समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने पूर्णिया के सांसद का बचाव करते हुए कहा कि पप्पू यादव राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य के तौर पर वहां पहुंचे थे। जिस तरह से ट्रस्ट से जुड़े लोगों ने राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी की है और मुख्य आरोपी के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है, उसे देखते हुए एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया गया। समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि हमने कभी किसी का अपमान करने की कोशिश नहीं की। असल में सरकार को यह बताना चाहिए कि उसने (दान की चोरी के मामले में) क्या कार्रवाई की है, क्योंकि इस मामले के सामने आए हुए अब लगभग दो महीने हो चुके हैं।









