
नई दिल्ली। अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने कई सहयोगियों, सुरक्षा कर्मियों, अधिकारियों और सीईओ के साथ चीन पहुंचे हैं। इनमें एलन मस्क, जेन्सेन हुआंग और अन्य लोग भी शामिल हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, अमरीकी अधिकारियों ने चीन में डिजिटल लॉकडाउन के साथ एंट्री ली। रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप के साथ यात्रा कर रहे कई अधिकारी अपने पर्सनल फोन और लैपटॉप नहीं लेकर गए। उसकी जगह वे ऐसे डिवाइस लेकर गए, जो एकदम क्लीन थे और जिनका एक्सेस सीमित था। यानी जिन डिवाइस में जरूरी डेटा नहीं था। बता दें कि ये डिवाइस को यात्रा के दौरान जासूसी, हैकिंग और डेटा चोरी होने पर रोक लगाने के लिए डिजाइन किए जाते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, अमरीकी सरकार में लंबे समय से ऐसी धारणा रही है कि चीन में लाई गई किसी भी चीज को खतरे में माना जाए। वर्तमान और पूर्व अमरीकी अधिकारियों ने बताया कि यह अमरीकी सरकार की पुरानी मान्यता पर आधारित है। इसके तहत चीन में लाई गई किसी भी चीज जैसे फोन, लैपटॉप, टैबलेट और यहां तक कि होटल के वाई-फाई नेटवर्क को भी खतरे में माना जाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, सेफहेवन सिक्योरिटी ग्रुप में कार्यकारी सुरक्षा के निदेशक और सीक्रेट सर्विस के पूर्व विशेष एजेंट बिल गेज ने बताया कि चीन बड़े पैमाने पर जासूसी करने वाला देश है। अमरीकी अधिकारियों के लिए ब्रीफिंग राष्ट्रपति के पहुंचने से काफी पहले शुरू हो जाती है और वे यह साफ कर देते हैं कि हर चीज पर नजर रखी जा रही है। दरअसल, डिजिटल लॉकडाउन केवल फोन और लैपटॉप तक ही सीमित नहीं है। बताया जा रहा है कि ये चार्जिंग डिवाइस के लिए भी है। अमरीकी साइबर सुरक्षा दिशा-निर्देशों ने यात्रियों को अनजान यूएसबी पोर्ट या चार्जिंग स्टेशनों का उपयोग न करने की चेतावनी दी है, क्योंकि इससे जासूसी से जुड़े जोखिम हैं।







