
मुरैना। छह साल की बच्ची और तजुर्बा 80 साल के डाक्टर। रोग बताने में बिलकुल परफेक्ट। यह बच्ची नाड़ी देखकर ही हृदय, फेफड़े और किडनी के बारे में बता देती है। खुद डाक्टर भी इसकी पुष्टि कर देते हैं। जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश के मुरैना की केशव कॉलोनी निवासी करीब छह वर्षीय कृतिका उपाध्याय के नाड़ी देखकर हृदय, फेफड़े और किडनी की स्थिति बताने के दावे ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। कृतिका के परिजनों के अनुसार वह बिना औपचारिक चिकित्सा प्रशिक्षण के नाड़ी देखकर मरीज की स्थिति के बारे में बताती है। हाल ही में रोटरी क्लब द्वारा आयोजित स्वास्थ्य शिविर में कृतिका ने एक मरीज की नाड़ी देखकर उसकी हृदय गति और कार्यक्षमता के संबंध में जानकारी दी।
परिजनों के अनुसार शिविर में मौजूद दिल्ली के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. युसुफ जमाल के सामने मरीज का ईसीजी कराया गया, जिसमें कृतिका की बताई बात सही पाई गई। इंदौर के अरविंदो मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन डॉ. विनोद भंडारी के बारे में भी परिजनों ने बताया कि उन्होंने कृतिका के ज्ञान को एमबीबीएस स्तर का बताया है। कृतिका के पिता बंटी उपाध्याय के अनुसार करीब तीन वर्ष की उम्र में ही कृतिका ने संजीवनी विद्या से संबंधित बातें बताकर उन्हें आश्चर्यचकित किया था। परिजनों के अनुसार कृतिका संस्कृत के श्लोक, वेद-पुराण और मृत संजीवनी विद्या से संबंधित बातें बताती है तथा एलोपैथी दवाओं के नाम सुनकर उनके साल्ट और रासायनिक सूत्र भी बताने का दावा किया जाता है। करह आश्रम के महामंडलेश्वर राघवाचार्य महाराज ने भी उसके ज्ञान को ईश्वरीय कृपा बताया है। कृतिका मरीजों को देखने के बदले कोई शुल्क नहीं लेती और लोगों से मंदिर में सेवा करने का संकल्प करवाती है। उसका सपना भविष्य में कार्डियोलॉजिस्ट बनने का है। हालांकि, नाड़ी देखकर किसी बीमारी का चिकित्सकीय निदान करने के इन दावों की स्वतंत्र चिकित्सा पुष्टि उपलब्ध नहीं है। किसी भी बीमारी या स्वास्थ्य संबंधी समस्या में प्रमाणित चिकित्सक की सलाह और आवश्यक जांच को ही आधार बनाया जाना चाहिए।








