
जोधपुर। राजस्थान उच्च न्यायालय की जोधपुर खंडपीठ ने नाबालिग से यौन उत्पीड़न के मामले में स्वयंभू संत आसाराम को की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है। न्यायमूर्ति अरुण मोंगा और न्यायमूर्ति योगेंद्र कुमार पुरोहित की पीठ ने बुधवार को अपना फैसला सुनाया। न्यायालय ने गत 20 अप्रैल को सुनवाई पूरी होने के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया था। न्यायालय ने आसाराम को तुरंत समर्पण करने के आदेश दिए हैं। वहीं इस मामले में सह-आरोपी शिल्पी और शरतचंद को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।
यह मामला वर्ष 2013 का है, जब जोधपुर स्थित आश्रम में एक नाबालिग छात्रा से यौन उत्पीड़न का आरोप लगा था। इस मामले में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम न्यायालय ने 25 अप्रैल 2018 को आसाराम को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसी फैसले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने जांच और साक्ष्यों पर सवाल उठाए, जबकि अभियोजन पक्ष ने पीड़िता के बयान को मजबूत और विश्वसनीय बताया। अदालत ने निचली अदालत के फैसले को सही मानते हुए सजा को बरकरार रखा।







