
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह (महासचिव) दत्तात्रेय होसबोले ने अमरीका में एक कार्यक्रम के दौरान संघ को लेकर विश्व स्तर पर फैली भ्रांतियों का कड़ा खंडन किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरएसएस अमरीका के कुख्यात श्वेत वर्चस्ववादी समूह ‘कु क्लक्स क्लान’ का कोई भारतीय संस्करण नहीं है। अमरीका के हडसन इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित ‘न्यू इंडिया कॉन्फ्रेंस’ में लेखक वाल्टर रसेल मीड के साथ एक सत्र में बोलते हुए होसबोले ने समाज के विभिन्न क्षेत्रों में संगठन द्वारा किए जा रहे जमीनी कार्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने ये भी कहा कि ‘भारत केवल सपेरों और मलिन बस्तियों का देश नहीं, बल्कि एक टेक हब है।’
होसबोले ने इस बात पर जोर दिया कि अमरीका और पश्चिमी दुनिया में अकसर भारत की एक बेहद सीमित और रूढि़वादी छवि पेश की जाती है। उन्होंने कहा कि अमरीका में आम धारणा यह है कि भारत अत्यधिक आबादी वाला देश है, जो मलिन बस्तियों, गरीबी, सपेरों और साधु-संतों से भरा हुआ है। होसबोले ने याद दिलाया कि इस पुरानी धारणा के कारण लोग यह भूल जाते हैं कि भारत आज एक वैश्विक टेक हब बन चुका है और दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। भारत के विकास के इन पहलुओं को आम अमरीकी धारणा में अकसर नजरअंदाज कर दिया जाता है।







